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मौर्य साम्राज्य (321 ईसा पूर्व–185 ईसा पूर्व) | संपूर्ण नोट्स | SSC, Railway, UPSC एवं सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए

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मौर्य साम्राज्य (321 ईसा पूर्व – 185 ईसा पूर्व)

  • मौर्य वंश ने 321 ईसा पूर्व से 185 ईसा पूर्व तक भारत पर शासन किया।
  • यह प्राचीन भारत का सबसे विशाल, शक्तिशाली तथा संगठित राजनीतिक एवं सैन्य साम्राज्य था।
  • चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ईसा पूर्व में नंद वंश का अंत करके मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।
  • यह भारत का प्रथम अखिल भारतीय (Pan-Indian) साम्राज्य था।
  • इसका विस्तार भारत के अधिकांश भाग, मध्य एवं उत्तर भारत तथा आधुनिक ईरान के कुछ क्षेत्रों तक था।
  • गंगा के मैदान पर अधिकार करने के बाद पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) इसकी राजधानी बनी।
  • मौर्य काल में राजतंत्र अपने सर्वोच्च विकास पर पहुँचा।
  • भारत का राष्ट्रीय प्रतीक (सारनाथ का सिंह स्तंभ) मौर्य काल से संबंधित है।
  • 185 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य का अंत हुआ।
  • मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था।

मौर्य साम्राज्य के प्रमुख प्रांत एवं उनकी राजधानियाँ

प्रांतदिशाराजधानी
उत्तरापथउत्तरतक्षशिला
अवन्तिराष्ट्रपश्चिमउज्जयिनी
प्राचीपूर्व एवं मध्यपाटलिपुत्र
कलिंगपूर्वतोशलि
दक्षिणापथदक्षिणसुवर्णगिरि

प्रमुख मौर्य स्थल

  • टोपरा (हरियाणा)
  • साँची (भोपाल) – अशोक स्तंभ के लिए प्रसिद्ध

चन्द्रगुप्त मौर्य (321–297 ईसा पूर्व)

  • मौर्य साम्राज्य के संस्थापक थे।
  • लगभग 25 वर्ष की आयु में नंद वंश के अंतिम शासक को पराजित किया।
  • इस विजय में कौटिल्य (चाणक्य/विष्णुगुप्त) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चाणक्य (कौटिल्य)

  • इन्हें भारत का मैकियावेली (Indian Machiavelli) कहा जाता है।
  • चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे।
  • बाद में बिन्दुसार के भी मुख्य सलाहकार रहे।
  • सेल्युकस-चन्द्रगुप्त संधि के प्रमुख सूत्रधार थे।

सेल्युकस-चन्द्रगुप्त संधि

  • युद्ध के बाद सेल्युकस निकेटर प्रथम और चन्द्रगुप्त के बीच संधि हुई।
  • चन्द्रगुप्त को प्राप्त क्षेत्र—
    • बलूचिस्तान
    • पूर्वी अफगानिस्तान
    • सिंधु नदी के पश्चिम का क्षेत्र
  • बदले में चन्द्रगुप्त ने सेल्युकस को 500 हाथी दिए।
  • इन हाथियों की सहायता से सेल्युकस ने इप्सस का युद्ध जीता।
  • इस संधि के बाद हिन्दूकुश पर्वत दोनों राज्यों की सीमा बना।

मौर्य साम्राज्य का उद्देश्य

  • सम्पूर्ण भारत को एक शासन के अधीन लाना।
  • कलिंग एवं दक्षिण के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश भारत पर अधिकार स्थापित करना।

चन्द्रगुप्त और जैन धर्म

  • जीवन के अंतिम समय में जैन धर्म अपनाया।
  • जैन परंपरा के अनुसार सल्लेखना व्रत द्वारा उपवास करते हुए मृत्यु प्राप्त की।
  • उनका निधन श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में हुआ।

भद्रबाहु

  • तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में प्रसिद्ध जैन आचार्य।
  • इन्होंने मगध में भयंकर अकाल की भविष्यवाणी की।
  • लगभग 12,000 जैन साधुओं के साथ पाटलिपुत्र से श्रवणबेलगोला चले गए।
  • चन्द्रगुप्त मौर्य भी इनके साथ गए।

मेगस्थनीज

  • यूनानी इतिहासकार एवं राजदूत।
  • सेल्युकस द्वारा चन्द्रगुप्त के दरबार में भेजा गया।
  • इन्होंने इंडिका (Indica) नामक ग्रंथ लिखा।
  • इन्हें भारतीय इतिहास का जनक भी कहा जाता है।
  • पाटलिपुत्र का विस्तृत वर्णन किया—
    • विशाल नगर
    • चारों ओर ऊँची दीवार
    • जल से भरी खाई
    • 570 बुर्ज
    • 64 द्वार

मेगस्थनीज के अनुसार भारतीय समाज के सात वर्ग

  1. दार्शनिक
  2. कृषक
  3. पशुपालक
  4. शिल्पकार एवं व्यापारी
  5. सैनिक
  6. निरीक्षक
  7. मंत्री/परामर्शदाता

बिन्दुसार (297–269 ईसा पूर्व)

  • यूनानी लेखकों ने इन्हें अमित्रोखेट्स (Amitrochates / Amitraghata) कहा।
  • चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र थे।
  • अनेक पुराण एवं महावंश में इनका उल्लेख मिलता है।
  • चाणक्य इनके प्रधानमंत्री रहे।
  • इन्होंने दक्षिण भारत (मैसूर तक) मौर्य साम्राज्य का विस्तार किया।
  • लगभग सम्पूर्ण भारतीय प्रायद्वीप को एक शासन के अंतर्गत लाया।

विदेशी संबंध

  • यूनान से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए।
  • डाइमेकस (Deimachus) इनके दरबार में यूनानी राजदूत था।
  • इन्होंने आजीवक संप्रदाय को संरक्षण दिया।
  • इनके गुरु पिंगलवत्स (आजीवक ब्राह्मण) थे।
  • लगभग 273 ईसा पूर्व में इनकी मृत्यु हुई।

अशोक (269–232 ईसा पूर्व)

  • भारत के महानतम सम्राटों में से एक।
  • बिन्दुसार के पुत्र थे।
  • इन्हें अशोक महान कहा जाता है।
  • जनता तक संदेश पहुँचाने के लिए शिलालेखों एवं स्तंभलेखों का व्यापक उपयोग करने वाले प्रथम भारतीय शासक थे।
  • राज्यारोहण के बाद उनका एकमात्र बड़ा युद्ध कलिंग युद्ध था।

कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व)

  • राज्याभिषेक के आठवें वर्ष लड़ा गया।
  • अशोक के शासन की सबसे महत्वपूर्ण घटना।
  • तेरहवें शिलालेख में इसका वर्णन मिलता है।
  • लगभग—
    • 1,50,000 लोग बंदी बनाए गए।
    • 1,00,000 लोग मारे गए।
  • इस विनाश को देखकर अशोक ने आगे युद्ध न करने का संकल्प लिया।

बौद्ध धर्म ग्रहण

  • कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया।
  • भेरीघोष (युद्ध) की नीति छोड़कर धम्मघोष की नीति अपनाई।
  • अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।
  • दक्षिण भारत, श्रीलंका, बर्मा सहित अनेक देशों में बौद्ध धर्म का प्रचार कराया।
  • "एक धर्म, एक भाषा और एक लिपि" के माध्यम से साम्राज्य को एकता प्रदान करने का प्रयास किया।

अशोक के स्तंभ लेख, भाषा एवं लिपि, साहित्यिक स्रोत, प्रशासन, अर्थव्यवस्था एवं समाज


अशोक के स्तंभ लेख (Pillar Edicts)

सम्राट अशोक ने अपने धम्म का प्रचार करने तथा प्रशासनिक संदेश जनता तक पहुँचाने के लिए पूरे साम्राज्य में अनेक पत्थर के स्तंभ स्थापित करवाए।

प्रमुख विशेषताएँ

  • चुनार (उत्तर प्रदेश) के उच्च गुणवत्ता वाले बलुआ पत्थर से निर्मित।
  • एक ही पत्थर (Monolithic) से बनाए गए।
  • ऊँचाई लगभग 12–15 मीटर
  • वजन लगभग 40–50 टन
  • स्तंभों के शीर्ष पर सुंदर पशु आकृतियाँ बनाई गई हैं।

प्रमुख स्तंभ लेख (Major Pillar Edicts)

अशोक के 7 प्रमुख स्तंभ लेख प्राप्त हुए हैं।


प्रथम स्तंभ लेख

  • नैतिक जीवन अपनाने की प्रेरणा।
  • धम्म का पालन करने का संदेश।
  • दया एवं सदाचार पर बल।

द्वितीय स्तंभ लेख

इसमें धम्म की परिभाषा दी गई है—

  • दया
  • दान
  • सत्य
  • पवित्रता
  • माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान

तृतीय स्तंभ लेख

लोगों को निम्न दोषों से बचने की सलाह दी गई—

  • क्रोध
  • अभिमान
  • ईर्ष्या
  • कठोरता

आत्मसंयम अपनाने पर बल दिया गया।


चतुर्थ स्तंभ लेख

  • राजुकों को निष्पक्ष न्याय करने का आदेश।
  • न्याय व्यवस्था में समानता।
  • उचित दंड व्यवस्था पर बल।

पंचम स्तंभ लेख

  • पशुओं की रक्षा का उल्लेख।
  • अनेक पशुओं के वध पर प्रतिबंध लगाया गया।
  • पशु कल्याण को बढ़ावा दिया गया।

षष्ठम स्तंभ लेख

  • राजा सदैव जनता के कल्याण के लिए उपलब्ध रहेगा।
  • प्रजा की समस्याओं के समाधान पर विशेष बल।

सप्तम स्तंभ लेख

यह अशोक का सबसे लंबा स्तंभ लेख है।

मुख्य विषय—

  • धार्मिक सहिष्णुता
  • लोककल्याण
  • नैतिक कर्तव्य
  • विश्व बंधुत्व
  • धम्म नीति का सार

लघु स्तंभ लेख (Minor Pillar Edicts)


रानी का स्तंभ लेख (Queen's Edict)

  • इसमें रानी कारुवाकी का उल्लेख मिलता है।
  • उनके द्वारा किए गए दान एवं धार्मिक कार्यों का वर्णन है।

संघभेद निषेध लेख (Schism Edict)

  • बौद्ध संघ में विभाजन रोकने के लिए जारी किया गया।
  • भिक्षुओं को अनुशासन बनाए रखने का निर्देश।

लुम्बिनी (रुम्मिनदेई) स्तंभ लेख

  • अशोक की लुम्बिनी यात्रा का उल्लेख।
  • लुम्बिनी को भगवान बुद्ध का जन्मस्थान बताया गया।
  • वहाँ के लोगों के कर में कमी की गई।

निगाली सागर स्तंभ लेख

  • बुद्ध कनकमुनि के स्तूप के विस्तार का उल्लेख।
  • अशोक की तीर्थ यात्रा का वर्णन।

अशोक के प्रमुख स्तंभ स्थल

  • सारनाथ
  • साँची
  • लौरिया नंदनगढ़
  • लौरिया अरेराज
  • रामपुरवा
  • प्रयागराज (इलाहाबाद)
  • दिल्ली-टोपरा
  • दिल्ली-Meerut
  • लुम्बिनी (नेपाल)
  • निगाली सागर (नेपाल)

सारनाथ का सिंह शीर्ष (Lion Capital)

सारनाथ का सिंह शीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • चार एशियाई सिंह पीठ से पीठ मिलाकर खड़े हैं।
  • गोलाकार आधार (Abacus) पर चार पशुओं की आकृतियाँ हैं—
    • हाथी
    • घोड़ा
    • बैल
    • सिंह
  • प्रत्येक पशु के बीच 24 तीलियों वाला धर्मचक्र बना है।

राष्ट्रीय महत्व

  • 26 जनवरी 1950 को इसे भारत का राष्ट्रीय प्रतीक अपनाया गया।
  • भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अशोक चक्र इसी से लिया गया है।
  • राष्ट्रीय आदर्श वाक्य—

"सत्यमेव जयते"

  • यह मुण्डक उपनिषद से लिया गया है।

मौर्य काल की भाषाएँ एवं लिपियाँ

अशोक ने विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय भाषा एवं लिपि का प्रयोग किया।


प्रमुख भाषाएँ

  • प्राकृत (अधिकांश अभिलेख)
  • यूनानी (Greek)
  • अरामाइक (Aramaic)

प्रमुख लिपियाँ

ब्राह्मी लिपि

  • अधिकांश अभिलेख इसी लिपि में हैं।
  • बाएँ से दाएँ लिखी जाती है।

खरोष्ठी लिपि

  • उत्तर-पश्चिम भारत में प्रचलित।
  • दाएँ से बाएँ लिखी जाती है।

यूनानी लिपि

  • मुख्यतः अफगानिस्तान क्षेत्र में।

अरामाइक लिपि

  • अफगानिस्तान में प्राप्त अभिलेखों में।

मौर्य काल के साहित्यिक स्रोत


अर्थशास्त्र

लेखक

कौटिल्य (चाणक्य/विष्णुगुप्त)

महत्व

इस ग्रंथ से जानकारी मिलती है—

  • प्रशासन
  • अर्थव्यवस्था
  • कर व्यवस्था
  • सेना
  • गुप्तचर व्यवस्था
  • विदेश नीति

इंडिका

लेखक

मेगस्थनीज

इसमें वर्णन है—

  • भारतीय समाज
  • प्रशासन
  • पाटलिपुत्र
  • सामाजिक व्यवस्था

बौद्ध ग्रंथ

  • महावंश
  • दीपवंश
  • दिव्यावदान
  • अशोकावदान

इनसे जानकारी मिलती है—

  • अशोक का जीवन
  • बौद्ध धर्म का प्रसार
  • मौर्य प्रशासन

जैन ग्रंथ

  • परिशिष्टपर्व
  • कल्पसूत्र

इनमें वर्णन है—

  • चन्द्रगुप्त मौर्य
  • भद्रबाहु
  • जैन धर्म का दक्षिण भारत में प्रसार

पुराण

  • मौर्य शासकों की वंशावली।
  • ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख।

मौर्य प्रशासन

मौर्य प्रशासन अत्यंत केन्द्रीकृत (Centralized) था।


राजा

  • सर्वोच्च शासक।
  • प्रशासन, न्याय, सेना एवं राजस्व का प्रमुख।

मंत्रिपरिषद

राजा की सहायता के लिए—

  • मंत्री
  • पुरोहित
  • सेनापति
  • युवराज

नियुक्त होते थे।


प्रांतीय प्रशासन

प्रमुख प्रांतों का शासन सामान्यतः राजकुमार (कुमार) करते थे।

मुख्य प्रांत—

  • तक्षशिला
  • उज्जयिनी
  • तोशलि
  • सुवर्णगिरि

जिला प्रशासन

मुख्य अधिकारी—

  • राजुक
  • प्रादेशिक
  • युक्त

ग्राम प्रशासन

ग्राम का प्रमुख—

ग्रामिक

ग्राम के बुजुर्ग भी प्रशासन में सहयोग करते थे।


राजस्व व्यवस्था

मुख्य आय का स्रोत

भूमि कर (भाग)

  • किसानों से उपज का 1/6 भाग कर के रूप में लिया जाता था।

अन्य कर

  • सीमा शुल्क
  • व्यापार कर
  • वन कर
  • खनिज कर
  • सिंचाई कर
  • नौका/घाट कर

मौर्य काल की अर्थव्यवस्था

मौर्य अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित थी।

मुख्य व्यवसाय—

  • कृषि
  • पशुपालन
  • व्यापार
  • हस्तशिल्प
  • धातु उद्योग
  • वस्त्र निर्माण

व्यापार

देश के भीतर तथा विदेशों के साथ व्यापार विकसित था।

व्यापारिक संबंध थे—

  • मध्य एशिया
  • पश्चिम एशिया
  • श्रीलंका
  • दक्षिण-पूर्व एशिया

कृषि

मुख्य फसलें—

  • धान
  • गेहूँ
  • जौ
  • दालें
  • गन्ना
  • कपास

सरकार द्वारा—

  • सिंचाई व्यवस्था
  • नहरों का निर्माण
  • जलाशयों का निर्माण

को बढ़ावा दिया गया।


सुदर्शन झील

  • चन्द्रगुप्त मौर्य के समय निर्मित।
  • निर्माण कराया—

पुष्यगुप्त (राज्यपाल)

  • बाद में अशोक के राज्यपाल तुषास्फ द्वारा मरम्मत कराई गई।

मौर्यकालीन सिक्के

मौर्य काल में आहत (Punch-marked) सिक्के प्रचलित थे।

विशेषताएँ

  • मुख्यतः चाँदी के बने होते थे।
  • अलग-अलग प्रतीकों की मुहर लगाई जाती थी।
  • व्यापार में व्यापक रूप से प्रयुक्त होते थे।

मौर्यकालीन समाज

मेगस्थनीज के अनुसार समाज सात वर्गों में विभाजित था—

  1. दार्शनिक
  2. कृषक
  3. पशुपालक
  4. शिल्पकार एवं व्यापारी
  5. सैनिक
  6. निरीक्षक
  7. मंत्री एवं सलाहकार

महिलाओं की स्थिति

  • धार्मिक कार्यों में भागीदारी।
  • राजमहल की सुरक्षा में नियुक्ति।
  • अर्थशास्त्र के अनुसार कुछ महिलाएँ गुप्तचर भी थीं।

दास प्रथा

  • मौर्य काल में दास प्रथा प्रचलित थी।
  • फिर भी दासों को कुछ कानूनी अधिकार प्राप्त थे।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • मौर्य साम्राज्य के संस्थापक — चन्द्रगुप्त मौर्य
  • अर्थशास्त्र के लेखक — कौटिल्य
  • यूनानी राजदूत — मेगस्थनीज
  • भारत का राष्ट्रीय प्रतीक — सारनाथ का सिंह स्तंभ
  • राष्ट्रीय आदर्श वाक्य — सत्यमेव जयते
  • प्रमुख लिपि — ब्राह्मी
  • उत्तर-पश्चिम की लिपि — खरोष्ठी
  • मुख्य कर — भूमि कर (भाग)
  • भूमि कर की दर — उपज का 1/6 भाग
  • प्रसिद्ध जलाशय — सुदर्शन झील
  • मौर्य काल का प्रमुख ग्रंथ — अर्थशास्त्र
  • सबसे बड़ा शिलालेख — प्रमुख शिलालेख XIII
  • सबसे लंबा स्तंभ लेख — सप्तम स्तंभ लेख
  • जनता के लिए अभिलेख जारी करने वाले प्रथम भारतीय शासक — सम्राट अशोक

प्रशासन, सैन्य व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, गुप्तचर प्रणाली, मौर्य साम्राज्य का पतन एवं महत्वपूर्ण तथ्य


मौर्य प्रशासन

मौर्य प्रशासन प्राचीन भारत की सबसे संगठित एवं अत्यधिक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था थी।

राजा शासन का सर्वोच्च अधिकारी होता था तथा प्रशासन, सेना, न्याय एवं वित्त पर उसका पूर्ण नियंत्रण होता था।


अष्टादश तीर्थ (18 प्रमुख विभाग)

कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार मौर्य शासन में 18 प्रमुख विभाग (तीर्थ) थे। प्रत्येक विभाग का प्रमुख अधिकारी महामात्र कहलाता था।

प्रमुख 18 तीर्थ

  1. मंत्री (Mantri)
  2. पुरोहित (Purohita)
  3. सेनापति (Senapati)
  4. युवराज (Yuvaraja)
  5. समाहर्ता (Samaharta) – राजस्व प्रमुख
  6. सन्निधाता (Sannidhata) – कोषाध्यक्ष
  7. दण्डपाल (Dandapala) – पुलिस प्रमुख
  8. दुर्गपाल (Durgapala) – दुर्गों का प्रमुख
  9. अन्तपाल (Antapala) – सीमांत क्षेत्रों का प्रमुख
  10. नागरक (Nagaraka) – नगर प्रशासन प्रमुख
  11. प्रशास्ता (Prashasta) – अभिलेख एवं दस्तावेज़ अधिकारी
  12. अक्षपटलाध्यक्ष (Akshapataladhyaksha) – मुख्य लेखाधिकारी
  13. पण्याध्यक्ष (Panyadhyaksha) – व्यापार विभाग प्रमुख
  14. सीताध्यक्ष (Sitadhyaksha) – कृषि विभाग प्रमुख
  15. आकराध्यक्ष (Akaradhyaksha) – खनिज एवं खान विभाग प्रमुख
  16. नावाध्यक्ष (Navadhyaksha) – नौपरिवहन विभाग प्रमुख
  17. शुल्काध्यक्ष (Sulkadhyaksha) – सीमा शुल्क अधिकारी
  18. सुराध्यक्ष (Suradhyaksha) – मदिरा विभाग प्रमुख

राजस्व प्रशासन

समाहर्ता

  • साम्राज्य का मुख्य राजस्व अधिकारी।
  • पूरे राज्य से कर वसूलने का उत्तरदायित्व।
  • वार्षिक बजट तैयार करता था।

सन्निधाता

  • राजकीय कोषाध्यक्ष।
  • राजकोष की देखभाल करता था।
  • आय एवं व्यय का लेखा-जोखा रखता था।

नगर प्रशासन

मेगस्थनीज के अनुसार पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन अत्यंत विकसित था।

  • नगर प्रशासन के लिए 30 सदस्यों का एक मंडल था।
  • इसे 6 समितियों में बाँटा गया था।
  • प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे।

समितियों के कार्य

  • उद्योगों का प्रबंधन।
  • जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण।
  • व्यापार एवं वाणिज्य की देखरेख।
  • कर संग्रह।
  • सफाई एवं स्वास्थ्य व्यवस्था।
  • बाजारों का निरीक्षण।

ग्राम प्रशासन

ग्रामिक

  • गाँव का प्रमुख अधिकारी।
  • कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना।
  • कर संग्रह में सहायता करना।

ग्राम के बुजुर्ग भी प्रशासन में सहयोग करते थे।


न्याय व्यवस्था

राजा सर्वोच्च न्यायाधिकारी होता था।

मुख्यतः दो प्रकार के न्यायालय थे—


धर्मस्थीय न्यायालय

यह दीवानी न्यायालय (Civil Court) था।

यहाँ निम्न मामलों की सुनवाई होती थी—

  • भूमि विवाद
  • संपत्ति विवाद
  • विवाह संबंधी मामले
  • उत्तराधिकार
  • अनुबंध (Contract)

कंटकशोधन न्यायालय

यह फौजदारी न्यायालय (Criminal Court) था।

यहाँ निम्न मामलों की सुनवाई होती थी—

  • चोरी
  • हत्या
  • डकैती
  • राजद्रोह
  • सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी अपराध

दंड व्यवस्था

मौर्य काल में दंड कठोर थे।

मुख्य दंड—

  • जुर्माना
  • कारावास
  • शारीरिक दंड
  • गंभीर अपराधों में मृत्युदंड

पुलिस व्यवस्था

पुलिस विभाग के प्रमुख कार्य—

  • कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना।
  • अपराधों की रोकथाम।
  • जनता की सुरक्षा।

दण्डपाल पुलिस विभाग का प्रमुख अधिकारी था।


गुप्तचर व्यवस्था

मौर्य साम्राज्य की गुप्तचर व्यवस्था प्राचीन विश्व की सबसे प्रभावशाली व्यवस्थाओं में से एक थी।

कौटिल्य के अनुसार—

"राजा को अपने राज्य के भीतर और बाहर होने वाली प्रत्येक गतिविधि की जानकारी होनी चाहिए।"


गुप्तचरों के प्रकार

संस्था गुप्तचर

  • स्थायी गुप्तचर।
  • एक निश्चित स्थान पर रहकर जानकारी एकत्र करते थे।

संचार गुप्तचर

  • भ्रमणशील गुप्तचर।
  • एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर सूचनाएँ एकत्र करते थे।

गुप्तचरों के वेश

गुप्तचर अनेक प्रकार के वेश धारण करते थे—

  • व्यापारी
  • संन्यासी
  • विद्यार्थी
  • गृहस्थ
  • कलाकार
  • भिक्षु

महिलाओं को भी गुप्तचर के रूप में नियुक्त किया जाता था।


सैन्य प्रशासन

मौर्य साम्राज्य की सेना प्राचीन विश्व की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक थी।

यूनानी लेखकों के अनुसार सेना में—

  • 6,00,000 पैदल सैनिक
  • 30,000 घुड़सवार
  • 9,000 युद्ध हाथी
  • 8,000 रथ

थे।


सैन्य समितियाँ

मेगस्थनीज के अनुसार सेना के संचालन के लिए 6 समितियाँ थीं।

प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे।

समितियाँ निम्न विभागों की देखरेख करती थीं—

  1. नौसेना
  2. परिवहन
  3. पैदल सेना
  4. घुड़सवार सेना
  5. रथ सेना
  6. हाथी सेना

आर्थिक प्रशासन

राज्य का नियंत्रण निम्न क्षेत्रों पर था—

  • कृषि
  • व्यापार
  • उद्योग
  • खान
  • वन
  • बाट एवं माप

राज्य आर्थिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखता था।


कृषि

मौर्य अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि थी।

सरकार द्वारा—

  • सिंचाई व्यवस्था
  • नहरों का निर्माण
  • जलाशयों का निर्माण
  • कृषि विकास

को प्रोत्साहन दिया जाता था।


उद्योग

मुख्य उद्योग—

  • वस्त्र उद्योग
  • धातु उद्योग
  • खनन
  • मिट्टी के बर्तन
  • जहाज निर्माण
  • हाथीदांत उद्योग
  • आभूषण निर्माण

व्यापार

देशीय एवं विदेशी व्यापार दोनों अत्यंत विकसित थे।

भारत के व्यापारिक संबंध थे—

  • मध्य एशिया
  • पश्चिम एशिया
  • श्रीलंका
  • दक्षिण-पूर्व एशिया

व्यापार का नियंत्रण पण्याध्यक्ष करता था।


मौर्य साम्राज्य के पतन के कारण

सम्राट अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य के पतन के अनेक कारण थे।


1. कमजोर उत्तराधिकारी

  • अशोक के उत्तराधिकारी योग्य नहीं थे।
  • विशाल साम्राज्य पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने में असफल रहे।

2. प्रशासनिक कमजोरी

  • साम्राज्य अत्यधिक विशाल हो गया था।
  • प्रांतीय शासक स्वतंत्र होने लगे।

3. आर्थिक समस्याएँ

  • लोककल्याणकारी योजनाओं पर अत्यधिक खर्च।
  • भारी करों के कारण जनता में असंतोष।

4. सैन्य कमजोरी

  • अशोक द्वारा अहिंसा अपनाने के बाद सेना की शक्ति में कमी आई।
  • सीमाओं की सुरक्षा कमजोर हो गई।

5. विदेशी आक्रमण

  • उत्तर-पश्चिम से यूनानी आक्रमण हुए।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों पर मौर्यों का नियंत्रण कमजोर पड़ गया।

6. प्रांतीय विद्रोह

  • अनेक प्रांतों ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी।
  • केंद्रीय सत्ता कमजोर हो गई।

7. बृहद्रथ की हत्या

  • मौर्य वंश के अंतिम शासक बृहद्रथ की 185 ईसा पूर्व में उनके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने हत्या कर दी।
  • इसके साथ ही मौर्य साम्राज्य का अंत हो गया।
  • पुष्यमित्र शुंग ने शुंग वंश की स्थापना की।

मौर्य साम्राज्य का महत्व

  • भारत में पहली बार राजनीतिक एकता स्थापित हुई।
  • अत्यंत विकसित एवं केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था विकसित हुई।
  • कृषि एवं व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  • बौद्ध धर्म का एशिया के अनेक देशों में प्रसार हुआ।
  • अशोक की धम्म नीति ने शांति एवं धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया।
  • सारनाथ का सिंह शीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना।
  • अशोक चक्र भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अंग बना।

प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

विषयमहत्वपूर्ण तथ्य
मौर्य साम्राज्य के संस्थापकचन्द्रगुप्त मौर्य
शुंग वंश के संस्थापकपुष्यमित्र शुंग
अंतिम मौर्य शासकबृहद्रथ
भारत का राष्ट्रीय प्रतीकसारनाथ का सिंह शीर्ष
राष्ट्रीय आदर्श वाक्यसत्यमेव जयते
अर्थशास्त्र के लेखककौटिल्य
यूनानी राजदूतमेगस्थनीज
यूनानी ग्रंथइंडिका
मुख्य करभाग (उपज का 1/6)
प्रमुख लिपिब्राह्मी
उत्तर-पश्चिम की लिपिखरोष्ठी
महानतम मौर्य सम्राटअशोक
कलिंग युद्ध261 ईसा पूर्व
तृतीय बौद्ध संगीति250 ईसा पूर्व (अशोक के शासनकाल में)
मौर्य साम्राज्य की राजधानीपाटलिपुत्र
भारत का प्रथम अखिल भारतीय साम्राज्यमौर्य साम्राज्य
जनता के लिए अभिलेख जारी करने वाले प्रथम भारतीय शासकसम्राट अशोक
प्रमुख शिलालेखों की संख्या14
प्रमुख स्तंभ लेखों की संख्या7
मौर्य शासनकाल321 ईसा पूर्व – 185 ईसा पूर्व

प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न

  • मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने की?चन्द्रगुप्त मौर्य
  • अर्थशास्त्र के लेखक कौन हैं?कौटिल्य (चाणक्य)
  • इंडिका किसने लिखी?मेगस्थनीज
  • कलिंग युद्ध का वर्णन किस शिलालेख में मिलता है?प्रमुख शिलालेख XIII
  • ब्राह्मी लिपि को किसने पढ़ा?जेम्स प्रिन्सेप (1837)
  • कलिंग युद्ध के बाद किस शासक ने बौद्ध धर्म अपनाया?सम्राट अशोक
  • मौर्य वंश का अंतिम शासक कौन था?बृहद्रथ
  • बृहद्रथ की हत्या किसने की?पुष्यमित्र शुंग
  • सुदर्शन झील का निर्माण किसके शासनकाल में हुआ?चन्द्रगुप्त मौर्य
  • मौर्य साम्राज्य की मुख्य आय का स्रोत क्या था?भूमि कर (भाग)

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