परिचय
छठी शताब्दी ईसा पूर्व में जैन धर्म और बौद्ध धर्म का उदय वैदिक कर्मकांड, पशुबलि तथा सामाजिक असमानताओं के विरोध के रूप में हुआ। दोनों धर्मों ने नैतिक जीवन, आत्मसंयम तथा मोक्ष/निर्वाण पर बल दिया, किन्तु इनके सिद्धांतों और साधना-पद्धतियों में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं।
जैन धर्म और बौद्ध धर्म में अंतर
1. मुख्य उद्देश्य
बौद्ध धर्म
- दुःखों का निवारण करना।
- तृष्णा और अज्ञान से मुक्ति प्राप्त करना।
- निर्वाण प्राप्त करना।
जैन धर्म
- आत्मा को कर्म बंधन से मुक्त करना।
- मोक्ष प्राप्त करना।
- सभी जीवों के प्रति अहिंसा का पालन करना।
2. धार्मिक संघ
बौद्ध धर्म
- धार्मिक संगठन को संघ (Sangha) कहा जाता है।
- भिक्षु (Bhikkhu) और भिक्षुणी (Bhikkhuni) होते हैं।
जैन धर्म
- साधु और साध्वी होते हैं।
- कठोर तपस्या और संयम का पालन करते हैं।
3. मोक्ष प्राप्ति का मार्ग
बौद्ध धर्म
- अष्टांगिक मार्ग का पालन।
- मध्यम मार्ग पर बल।
जैन धर्म
- तपस्या, संयम और कर्मों के नाश द्वारा मोक्ष।
- कठोर आत्मसंयम पर बल।
4. जीवन पद्धति
बौद्ध धर्म
- मध्यम मार्ग (Middle Path)।
- न अत्यधिक भोग, न अत्यधिक तप।
जैन धर्म
- कठोर तपस्या और त्याग।
- आत्मकष्ट को साधना का साधन माना गया।
5. साहित्य की भाषा
बौद्ध धर्म
- पाली भाषा प्रमुख।
- महायान ग्रंथ संस्कृत में भी लिखे गए।
जैन धर्म
- प्राकृत भाषा प्रमुख।
- विशेष रूप से अर्धमागधी और मागधी।
6. पाप की अवधारणा
बौद्ध धर्म
- पाप की स्पष्ट अवधारणा नहीं।
- गलत कर्म दुःख का कारण हैं।
जैन धर्म
- किसी भी जीव को कष्ट पहुँचाना पाप है।
7. जाति व्यवस्था
बौद्ध धर्म
- जाति व्यवस्था का विरोध।
- सभी वर्गों के लिए समान अवसर।
जैन धर्म
- जाति व्यवस्था का खुला विरोध नहीं किया।
8. मोक्ष का स्वरूप
बौद्ध धर्म
- मन की शुद्धि द्वारा निर्वाण।
जैन धर्म
- आत्मा को कर्म बंधन से मुक्त करके मोक्ष।
जैन धर्म और बौद्ध धर्म की समानताएँ
1. कर्म सिद्धांत
दोनों धर्म कर्म और पुनर्जन्म को मानते हैं।
2. वैदिक कर्मकांड का विरोध
दोनों ने यज्ञ और पशुबलि का विरोध किया।
3. संन्यास पर बल
दोनों धर्म त्याग और संयम का समर्थन करते हैं।
4. नैतिक जीवन
दोनों ने सत्य, अहिंसा और सदाचार पर बल दिया।
5. श्रमण परंपरा
दोनों धर्म श्रमण परंपरा से संबंधित हैं।
बौद्ध धर्म का भौगोलिक प्रसार
आज बौद्ध धर्म मुख्य रूप से निम्न देशों में पाया जाता है—
- श्रीलंका
- नेपाल
- भूटान
- तिब्बत
- चीन
- जापान
- कोरिया
- मंगोलिया
- थाईलैंड
- म्यांमार
- कंबोडिया
- लाओस
- वियतनाम
- सिंगापुर
जैन धर्म का योगदान
1. अहिंसा का प्रचार
- जैन धर्म ने अहिंसा को सर्वोच्च धर्म माना।
- महात्मा गांधी पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
2. सामाजिक सुधार
- पशुबलि का विरोध।
- नैतिक जीवन का प्रचार।
3. शांति और सहिष्णुता
- सभी जीवों के प्रति करुणा का संदेश।
4. नैतिक मूल्यों का विकास
- सत्य
- अहिंसा
- अपरिग्रह
- ब्रह्मचर्य
5. कर्मकांड का विरोध
- जटिल धार्मिक अनुष्ठानों की आलोचना।
बौद्ध धर्म
परिचय
- बौद्ध धर्म की स्थापना गौतम बुद्ध ने की।
- इसका उदय छठी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ।
- यह विश्व के प्रमुख धर्मों में से एक है।
- इसका मुख्य उद्देश्य मानव दुःखों का अंत करना है।
गौतम बुद्ध
जन्म
- जन्म: 563 ईसा पूर्व
- जन्मस्थान: लुंबिनी (नेपाल)
- कुल: शाक्य कुल
- पिता: शुद्धोधन
- माता: महामाया
अशोक का अभिलेख
- सम्राट अशोक ने 249 ईसा पूर्व में लुंबिनी में एक स्तंभ स्थापित किया।
- इससे बुद्ध के जन्मस्थान की पुष्टि होती है।
महाप्रजापति गौतमी
- बुद्ध की मौसी एवं सौतेली माता।
- पहली महिला भिक्षुणी।
- बौद्ध संघ में महिलाओं के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त किया।
महाभिनिष्क्रमण (महान त्याग)
- 29 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ ने गृह त्याग किया।
- सांसारिक सुखों का परित्याग किया।
- सत्य की खोज में निकल पड़े।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण
महाभिनिष्क्रमण = 29 वर्ष की आयु में गृह त्याग
त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
- जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर → महावीर स्वामी
- बौद्ध धर्म के संस्थापक → गौतम बुद्ध
- बुद्ध का जन्म → लुंबिनी
- पिता → शुद्धोधन
- माता → महामाया
- कुल → शाक्य
- महाभिनिष्क्रमण → 29 वर्ष की आयु में
- प्रथम भिक्षुणी → महाप्रजापति गौतमी
- अशोक स्तंभ → लुंबिनी
बोधि प्राप्ति (ज्ञान प्राप्ति)
- गृह त्याग के बाद सिद्धार्थ गौतम ने अनेक गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की।
- उन्होंने कठोर तपस्या की, किन्तु उन्हें सत्य की प्राप्ति नहीं हुई।
- बाद में उन्होंने अत्यधिक तपस्या छोड़कर मध्यम मार्ग (Middle Path) अपनाया।
- बिहार के बोधगया में पीपल के वृक्ष (बोधि वृक्ष) के नीचे ध्यान लगाया।
- लगातार 49 दिनों की साधना के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
- इसके बाद वे बुद्ध (ज्ञान प्राप्त व्यक्ति) कहलाए।
महत्वपूर्ण तथ्य
- ज्ञान प्राप्ति स्थल → बोधगया (बिहार)
- वृक्ष → बोधि वृक्ष
- नदी → निरंजना (फल्गु) नदी
- आयु → 35 वर्ष
धर्मचक्र प्रवर्तन (प्रथम उपदेश)
- ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध सारनाथ पहुँचे।
- सारनाथ के मृगदाय (Deer Park) में अपने पाँच पूर्व साथियों को पहला उपदेश दिया।
- इस घटना को धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है।
महत्व
- बौद्ध धर्म के प्रचार की शुरुआत।
- प्रथम बौद्ध संघ की स्थापना।
परीक्षा तथ्य
प्रथम उपदेश → सारनाथ
धर्मचक्र प्रवर्तन → प्रथम उपदेश
बुद्ध से जुड़े चार प्रमुख तीर्थ स्थल
1. लुंबिनी
- जन्म स्थान
2. बोधगया
- ज्ञान प्राप्ति स्थल
3. सारनाथ
- प्रथम उपदेश स्थल
4. कुशीनगर
- महापरिनिर्वाण स्थल
बुद्ध के उपदेश
- बुद्ध ने लगभग 45 वर्षों तक धर्म का प्रचार किया।
- उन्होंने सबसे अधिक उपदेश श्रावस्ती में दिए।
- उनका अंतिम उपदेश वैशाली में माना जाता है।
महापरिनिर्वाण
- बुद्ध का निधन 80 वर्ष की आयु में हुआ।
- स्थान → कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)
- समय → 483 ईसा पूर्व (परंपरागत मान्यता)
महापरिनिर्वाण का अर्थ
- जन्म-मरण के चक्र से अंतिम मुक्ति।
महत्वपूर्ण तथ्य
- बुद्ध का दाह संस्कार → रामभर स्तूप
- कुशीनगर → महापरिनिर्वाण स्थल
बुद्ध के गुरु
आलार कालाम
- बुद्ध के प्रथम गुरु।
- ध्यान एवं आध्यात्मिक साधना की शिक्षा दी।
उद्दक रामपुत्र
- बुद्ध के द्वितीय गुरु।
- उच्च स्तर की योग साधना सिखाई।
बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाएँ एवं प्रतीक
| प्रतीक | घटना |
|---|---|
| श्वेत हाथी | गर्भाधान |
| कमल/बैल | जन्म |
| घोड़ा | महाभिनिष्क्रमण |
| बोधि वृक्ष | ज्ञान प्राप्ति |
| धर्मचक्र | प्रथम उपदेश |
| स्तूप | महापरिनिर्वाण |
बौद्ध धर्म की मूल शिक्षाएँ
मुख्य उद्देश्य
- मानव जीवन के दुःखों का अंत करना।
- निर्वाण प्राप्त करना।
- तृष्णा एवं अज्ञान का नाश करना।
मध्यम मार्ग (Madhyam Marg)
अर्थ
- न अत्यधिक भोग।
- न अत्यधिक तपस्या।
महत्व
- संतुलित जीवन का मार्ग।
- मानसिक शांति और ज्ञान प्राप्ति का साधन।
पंचशील
बुद्ध ने सामान्य लोगों के लिए पाँच नैतिक नियम बताए।
1. अहिंसा
किसी जीव की हत्या न करना।
2. अस्तेय
चोरी न करना।
3. सत्य
झूठ न बोलना।
4. ब्रह्मचर्य / सदाचार
अनैतिक आचरण से बचना।
5. मादक पदार्थों का त्याग
शराब एवं नशे से दूर रहना।
त्रिरत्न (Three Jewels)
बौद्ध धर्म में शरण लेने के तीन आधार हैं—
1. बुद्ध
ज्ञान प्राप्त गुरु।
2. धम्म (धर्म)
बुद्ध की शिक्षाएँ।
3. संघ
भिक्षुओं का संगठन।
प्रसिद्ध मंत्र
बुद्धं शरणं गच्छामि
धम्मं शरणं गच्छामि
संघं शरणं गच्छामि
चार आर्य सत्य (Four Noble Truths)
बुद्ध की शिक्षाओं का आधार।
प्रथम आर्य सत्य – दुःख
- संसार दुःखमय है।
उदाहरण
- जन्म
- बुढ़ापा
- बीमारी
- मृत्यु
द्वितीय आर्य सत्य – दुःख का कारण
- तृष्णा (इच्छा) ही दुःख का कारण है।
इसमें शामिल
- लोभ
- मोह
- लालच
- आसक्ति
तृतीय आर्य सत्य – दुःख निरोध
- तृष्णा का अंत होने पर दुःख समाप्त हो सकता है।
परिणाम
निर्वाण
चतुर्थ आर्य सत्य – मार्ग
- दुःख समाप्त करने का मार्ग है।
वह मार्ग है
अष्टांगिक मार्ग
अष्टांगिक मार्ग (Ashtangika Marg)
प्रज्ञा (ज्ञान)
1. सम्यक दृष्टि
सही दृष्टिकोण रखना।
2. सम्यक संकल्प
सही विचार रखना।
शील (नैतिकता)
3. सम्यक वाणी
सत्य बोलना।
4. सम्यक कर्म
सही कार्य करना।
5. सम्यक आजीविका
ईमानदारी से जीविका कमाना।
समाधि (मानसिक अनुशासन)
6. सम्यक प्रयास
अच्छे कार्यों का प्रयास करना।
7. सम्यक स्मृति
सदैव सजग रहना।
8. सम्यक समाधि
ध्यान एवं एकाग्रता।
अष्टांगिक मार्ग का महत्व
- दुःखों का अंत करता है।
- निर्वाण प्राप्ति का साधन है।
- नैतिक जीवन सिखाता है।
- मानसिक शांति प्रदान करता है।
परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य
ज्ञान प्राप्ति
➡️ बोधगया
प्रथम उपदेश
➡️ सारनाथ
महापरिनिर्वाण
➡️ कुशीनगर
बौद्ध धर्म का प्रतीक
➡️ धर्मचक्र
तीन रत्न
➡️ बुद्ध, धम्म, संघ
चार आर्य सत्य
➡️ दुःख, दुःख का कारण, दुःख निरोध, मार्ग
निर्वाण का मार्ग
➡️ अष्टांगिक मार्ग
पंचशील
➡️ पाँच नैतिक नियम
Vitorr Classes Quick Revision
- बुद्ध को 35 वर्ष की आयु में ज्ञान प्राप्त हुआ।
- ज्ञान प्राप्ति → बोधगया।
- प्रथम उपदेश → सारनाथ।
- मृत्यु → कुशीनगर।
- मध्यम मार्ग बौद्ध धर्म का मूल सिद्धांत है।
- चार आर्य सत्य बौद्ध दर्शन का आधार हैं।
- अष्टांगिक मार्ग निर्वाण का मार्ग है।
- त्रिरत्न → बुद्ध, धम्म, संघ।
- पंचशील → बौद्ध नैतिक जीवन का आधार।
बौद्ध साहित्य
परिचय
- बुद्ध के उपदेश प्रारम्भ में मौखिक रूप से सुरक्षित रखे गए थे।
- भिक्षु उन्हें याद करके पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाते थे।
- बाद में इन शिक्षाओं को लिखित रूप दिया गया।
- बौद्ध साहित्य मुख्यतः पाली भाषा में लिखा गया।
- महायान बौद्ध साहित्य का बड़ा भाग संस्कृत में रचा गया।
त्रिपिटक (Tripitaka)
अर्थ
- "त्रिपिटक" का अर्थ है तीन पिटारे (Three Baskets)।
- यह बौद्ध धर्म का सबसे प्राचीन एवं महत्वपूर्ण ग्रंथ संग्रह है।
त्रिपिटक के तीन भाग
- विनय पिटक
- सुत्त पिटक
- अभिधम्म पिटक
1. विनय पिटक
विषय
- भिक्षुओं और भिक्षुणियों के नियम।
- संघ का संगठन।
- अनुशासन संबंधी प्रावधान।
महत्व
- इसे बौद्ध संघ का संविधान कहा जाता है।
2. सुत्त पिटक
विषय
- बुद्ध के उपदेश एवं प्रवचन।
पाँच निकाय
दीर्घ निकाय
लंबे उपदेशों का संग्रह।
मज्झिम निकाय
मध्यम आकार के उपदेश।
संयुक्त निकाय
विषयवार उपदेश।
अंगुत्तर निकाय
संख्याओं के आधार पर व्यवस्थित उपदेश।
खुद्दक निकाय
विविध ग्रंथों का संग्रह।
3. अभिधम्म पिटक
विषय
- बौद्ध दर्शन
- मनोविज्ञान
- तत्वज्ञान
- चेतना का विश्लेषण
महत्व
- बौद्ध दर्शन का वैज्ञानिक एवं दार्शनिक अध्ययन।
प्रमुख बौद्ध ग्रंथ
बुद्धचरित
लेखक
अश्वघोष
विशेषताएँ
- गौतम बुद्ध की जीवनी।
- संस्कृत भाषा में रचित।
- बौद्ध साहित्य की महान कृति।
परीक्षा तथ्य
बुद्धचरित के लेखक → अश्वघोष
दिव्यावदान
विशेषताएँ
- 36 कथाओं का संग्रह।
- बौद्ध धर्म के प्रसार का वर्णन।
- अनेक ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी मिलती है।
मिलिंदपन्हो
अर्थ
"मिलिंद के प्रश्न"
विषय
- इंडो-ग्रीक शासक मिलिंद (मेनांडर) तथा भिक्षु नागसेन के बीच संवाद।
महत्व
- बौद्ध दर्शन का उत्कृष्ट ग्रंथ।
परीक्षा तथ्य
मिलिंद = मेनांडर
संवाद = नागसेन एवं मेनांडर
दीपवंश
विशेषताएँ
- श्रीलंका का सबसे प्राचीन ऐतिहासिक ग्रंथ।
- बौद्ध धर्म के प्रसार का वर्णन।
महत्व
- बौद्ध इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत।
महावंश
लेखक
महानाम
विशेषताएँ
- श्रीलंका का ऐतिहासिक ग्रंथ।
- बौद्ध धर्म के विकास का विवरण।
महत्व
- मौर्य इतिहास के अध्ययन में उपयोगी।
जातक कथाएँ
परिचय
- जातक का अर्थ है पूर्व जन्म की कथाएँ।
- इनमें बुद्ध के पूर्व जन्मों का वर्णन है।
भाषा
- पाली
संख्या
- लगभग 550 कथाएँ
जातक कथाओं का महत्व
- बौद्ध नैतिक शिक्षा का आधार।
- समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति की जानकारी।
- लोकजीवन का चित्रण।
प्रमुख जातक कथाएँ
1. छद्दंत जातक
छः दाँत वाले हाथी की कथा।
2. रुरु जातक
दयालु हिरण की कथा।
3. शिबि जातक
राजा शिबि के त्याग की कथा।
4. वेस्संतर जातक
दानशीलता की कथा।
5. श्याम जातक
माता-पिता की सेवा की कथा।
प्रमुख बौद्ध विद्वान
मोग्गलिपुत्त तिस्स
परिचय
- महान बौद्ध विद्वान।
- तृतीय बौद्ध संगीति के अध्यक्ष।
योगदान
- अशोक के काल में बौद्ध धर्म के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका।
परीक्षा तथ्य
तृतीय बौद्ध संगीति के अध्यक्ष → मोग्गलिपुत्त तिस्स
अश्वघोष
परिचय
- महान संस्कृत कवि।
- कनिष्क के दरबार के विद्वान।
प्रमुख रचनाएँ
- बुद्धचरित
- सौन्दरानंद
महत्व
- संस्कृत बौद्ध साहित्य के जनक माने जाते हैं।
नागार्जुन
परिचय
- महायान बौद्ध धर्म के महान दार्शनिक।
सिद्धांत
शून्यवाद (Shunyavada)
- सभी वस्तुएँ अस्थायी एवं परिवर्तनशील हैं।
परीक्षा तथ्य
शून्यवाद के प्रवर्तक → नागार्जुन
बुद्धघोष
परिचय
- श्रीलंका के प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान।
प्रमुख ग्रंथ
विशुद्धिमग्ग
(शुद्धि का मार्ग)
महत्व
- थेरवाद बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण ग्रंथ।
धर्मकीर्ति
परिचय
- प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक।
- नालंदा विश्वविद्यालय से संबंधित।
योगदान
- तर्कशास्त्र एवं ज्ञानमीमांसा का विकास।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
त्रिपिटक के भाग
➡️ विनय पिटक, सुत्त पिटक, अभिधम्म पिटक
बुद्धचरित के लेखक
➡️ अश्वघोष
मिलिंदपन्हो में संवाद
➡️ मेनांडर एवं नागसेन
श्रीलंका का सबसे प्राचीन ग्रंथ
➡️ दीपवंश
महावंश के लेखक
➡️ महानाम
जातक कथाएँ
➡️ बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ
शून्यवाद के प्रवर्तक
➡️ नागार्जुन
विशुद्धिमग्ग के लेखक
➡️ बुद्धघोष
तृतीय बौद्ध संगीति के अध्यक्ष
➡️ मोग्गलिपुत्त तिस्स
Vitorr Classes Quick Revision
- त्रिपिटक = बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रंथ।
- विनय पिटक = संघ के नियम।
- सुत्त पिटक = बुद्ध के उपदेश।
- अभिधम्म पिटक = बौद्ध दर्शन।
- बुद्धचरित = अश्वघोष।
- मिलिंदपन्हो = नागसेन एवं मेनांडर संवाद।
- दीपवंश = श्रीलंका का प्राचीन इतिहास।
- महावंश = महानाम द्वारा रचित।
- जातक कथाएँ = बुद्ध के पूर्व जन्म।
- नागार्जुन = शून्यवाद।
- बुद्धघोष = विशुद्धिमग्ग।
बौद्ध संगीतियाँ (Buddhist Councils)
बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनकी शिक्षाओं को सुरक्षित रखने तथा बौद्ध संघ में अनुशासन बनाए रखने के लिए समय-समय पर चार प्रमुख बौद्ध संगीतियाँ आयोजित की गईं।
प्रथम बौद्ध संगीति
समय
483 ईसा पूर्व
स्थान
राजगृह (राजगीर)
संरक्षक
अजातशत्रु
अध्यक्ष
महाकश्यप
प्रमुख कार्य
- बुद्ध के उपदेशों का संकलन।
- विनय एवं धम्म का संरक्षण।
महत्व
- बौद्ध धर्म की पहली आधिकारिक सभा।
परीक्षा तथ्य
प्रथम बौद्ध संगीति → राजगृह → अजातशत्रु
द्वितीय बौद्ध संगीति
समय
383 ईसा पूर्व
स्थान
वैशाली
संरक्षक
कालाशोक
अध्यक्ष
सब्बकामी
प्रमुख कार्य
- संघ में अनुशासन संबंधी विवादों का समाधान।
- मतभेदों के कारण बौद्ध धर्म दो भागों में विभाजित हुआ।
विभाजन
- स्थविरवाद (Sthaviravada)
- महासांघिक (Mahasanghika)
तृतीय बौद्ध संगीति
समय
250 ईसा पूर्व
स्थान
पाटलिपुत्र
संरक्षक
सम्राट अशोक
अध्यक्ष
मोग्गलिपुत्त तिस्स
प्रमुख कार्य
- संघ की शुद्धि।
- बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु मिशन भेजे गए।
- अभिधम्म पिटक का व्यवस्थित संकलन।
महत्व
- बौद्ध धर्म का अंतरराष्ट्रीय विस्तार प्रारम्भ हुआ।
चतुर्थ बौद्ध संगीति
समय
72 ईस्वी
स्थान
कश्मीर (कुंडलवन)
संरक्षक
कनिष्क
अध्यक्ष
वसुमित्र
उपाध्यक्ष
अश्वघोष
प्रमुख कार्य
- बौद्ध धर्म दो प्रमुख शाखाओं में विभाजित हुआ।
शाखाएँ
- महायान
- हीनयान
बौद्ध धर्म की प्रमुख शाखाएँ
महायान बौद्ध धर्म
अर्थ
"महान वाहन"
विशेषताएँ
- बुद्ध को ईश्वर समान माना गया।
- मूर्ति पूजा को स्वीकार किया गया।
- बोधिसत्व की अवधारणा विकसित हुई।
- संस्कृत भाषा का प्रयोग।
आदर्श
बोधिसत्व
जो स्वयं निर्वाण प्राप्त करने के बाद भी दूसरों के कल्याण के लिए संसार में रहता है।
प्रसार
- चीन
- जापान
- कोरिया
- तिब्बत
- मंगोलिया
हीनयान बौद्ध धर्म
अर्थ
"छोटा वाहन"
विशेषताएँ
- बुद्ध को महान शिक्षक माना गया।
- मूर्ति पूजा का विरोध।
- व्यक्तिगत मोक्ष पर बल।
- मूल शिक्षाओं का पालन।
आदर्श
अर्हत
थेरवाद बौद्ध धर्म
अर्थ
"प्राचीनों का सिद्धांत"
विशेषताएँ
- हीनयान की आधुनिक शाखा।
- पाली भाषा का उपयोग।
- बुद्ध की मूल शिक्षाओं पर आधारित।
प्रसार
- श्रीलंका
- म्यांमार
- थाईलैंड
- लाओस
- कंबोडिया
वज्रयान बौद्ध धर्म
अर्थ
"वज्र का मार्ग"
अन्य नाम
- तांत्रिक बौद्ध धर्म
विशेषताएँ
- मंत्र, तंत्र एवं योग पर बल।
- गूढ़ साधनाएँ।
- शीघ्र ज्ञान प्राप्ति का मार्ग।
प्रसार
- तिब्बत
- भूटान
- मंगोलिया
जेन बौद्ध धर्म
उत्पत्ति
- चीन में "चान" परंपरा के रूप में।
- बाद में जापान पहुँचा।
विशेषताएँ
- ध्यान पर विशेष बल।
- आत्मानुभूति को महत्व।
- सरलता एवं अनुशासन।
बोधिसत्व
अर्थ
- ऐसा व्यक्ति जो बुद्धत्व प्राप्त करने में सक्षम हो।
- परंतु सभी जीवों के कल्याण हेतु निर्वाण को स्थगित कर दे।
प्रमुख बोधिसत्व
मैत्रेय
- भविष्य के बुद्ध।
- आने वाले समय में बुद्ध के रूप में प्रकट होंगे।
अवलोकितेश्वर
- करुणा के बोधिसत्व।
- महायान बौद्ध धर्म में अत्यंत लोकप्रिय।
मंजुश्री
- ज्ञान एवं बुद्धि के बोधिसत्व।
वज्रपाणि
- शक्ति एवं संरक्षण के प्रतीक।
क्षितिगर्भ
- करुणा एवं दया के प्रतीक।
बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण शब्द
अर्हत
अर्थ
- जिसने निर्वाण प्राप्त कर लिया हो।
- हीनयान बौद्ध धर्म का सर्वोच्च आदर्श।
श्रमण
अर्थ
- संसार त्याग कर तपस्या करने वाला व्यक्ति।
प्रव्रज्या (Pabbajja)
अर्थ
- गृह त्याग कर संघ में प्रवेश।
उपसम्पदा
अर्थ
- पूर्ण भिक्षु बनने की दीक्षा।
चैत्य
अर्थ
- बौद्ध प्रार्थना स्थल।
उदाहरण
- कार्ले चैत्य
- भाजा चैत्य
- अजंता चैत्य
विहार
अर्थ
- भिक्षुओं का निवास स्थान।
कार्य
- शिक्षा
- साधना
- निवास
उपोसथ
अर्थ
- आत्मचिंतन एवं शुद्धि का दिन।
वर्षावास (वस्स)
अर्थ
- वर्षा ऋतु में भिक्षुओं का एक स्थान पर रहना।
अवधि
- लगभग 3 महीने
बौद्ध धर्म का प्रसार
प्रसार के कारण
1. सरल शिक्षाएँ
- सामान्य लोगों के लिए समझना आसान।
2. स्थानीय भाषा
- पाली एवं प्राकृत का उपयोग।
3. राजकीय संरक्षण
मुख्य शासक—
- अशोक
- कनिष्क
- हर्षवर्धन
4. संघ व्यवस्था
- संगठित भिक्षु समुदाय।
5. मिशनरी गतिविधियाँ
- विभिन्न देशों में धर्म प्रचार।
बौद्ध धर्म का विश्व में प्रसार
दक्षिण एशिया
- भारत
- श्रीलंका
दक्षिण-पूर्व एशिया
- थाईलैंड
- म्यांमार
- कंबोडिया
- लाओस
- इंडोनेशिया
पूर्वी एशिया
- चीन
- जापान
- कोरिया
मध्य एशिया
- रेशम मार्ग के क्षेत्रों में
तिब्बत
- वज्रयान बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
प्रथम बौद्ध संगीति
➡️ राजगृह
द्वितीय बौद्ध संगीति
➡️ वैशाली
तृतीय बौद्ध संगीति
➡️ पाटलिपुत्र
चतुर्थ बौद्ध संगीति
➡️ कश्मीर
तृतीय संगीति के अध्यक्ष
➡️ मोग्गलिपुत्त तिस्स
चतुर्थ संगीति के संरक्षक
➡️ कनिष्क
महायान का आदर्श
➡️ बोधिसत्व
हीनयान का आदर्श
➡️ अर्हत
भविष्य के बुद्ध
➡️ मैत्रेय
करुणा के बोधिसत्व
➡️ अवलोकितेश्वर
ज्ञान के बोधिसत्व
➡️ मंजुश्री
बौद्ध प्रार्थना स्थल
➡️ चैत्य
भिक्षुओं का निवास
➡️ विहार
Vitorr Classes Quick Revision
- 1st Council → राजगृह → अजातशत्रु।
- 2nd Council → वैशाली → कालाशोक।
- 3rd Council → पाटलिपुत्र → अशोक।
- 4th Council → कश्मीर → कनिष्क।
- महायान = बोधिसत्व।
- हीनयान = अर्हत।
- थेरवाद = पाली परंपरा।
- वज्रयान = तांत्रिक बौद्ध धर्म।
- जेन = ध्यान आधारित।
- चैत्य = प्रार्थना स्थल।
- विहार = मठ।
भारत में बौद्ध धर्म के पतन के कारण
गुप्त काल के बाद भारत में बौद्ध धर्म का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा। 12वीं शताब्दी तक आते-आते भारत में बौद्ध धर्म लगभग समाप्त हो गया, जबकि एशिया के अन्य देशों में इसका विस्तार होता रहा।
1. संघों में भ्रष्टाचार
- प्रारंभिक भिक्षु अत्यंत सादगीपूर्ण जीवन जीते थे।
- समय के साथ मठों में धन-संपत्ति बढ़ने लगी।
- कई भिक्षु अनुशासनहीन एवं विलासी हो गए।
परिणाम
जनता का विश्वास कम होने लगा।
2. ब्राह्मण धर्म का पुनरुत्थान
- गुप्त काल में ब्राह्मण धर्म को पुनः संरक्षण मिला।
- वैदिक धर्म का पुनर्जागरण हुआ।
- आदि शंकराचार्य जैसे विद्वानों ने हिन्दू दर्शन को मजबूत किया।
परिणाम
लोग पुनः हिन्दू धर्म की ओर आकर्षित हुए।
3. बौद्ध धर्म का विभाजन
समय के साथ अनेक शाखाएँ विकसित हुईं—
- हीनयान
- महायान
- वज्रयान
- जेन
परिणाम
एकता कमजोर हुई।
4. संस्कृत भाषा का प्रयोग
- प्रारंभिक बौद्ध साहित्य पाली भाषा में था।
- बाद में महायान सम्प्रदाय ने संस्कृत भाषा का प्रयोग बढ़ा दिया।
परिणाम
सामान्य जनता बौद्ध साहित्य से दूर होने लगी।
5. मूर्ति पूजा एवं कर्मकांड
- प्रारंभिक बौद्ध धर्म सरल था।
- बाद में मूर्ति पूजा एवं जटिल अनुष्ठान बढ़ गए।
परिणाम
बौद्ध धर्म अपनी मूल सादगी खो बैठा।
6. राजकीय संरक्षण का अभाव
- अशोक, कनिष्क और हर्षवर्धन के बाद बौद्ध धर्म को बड़े शासकों का संरक्षण नहीं मिला।
परिणाम
मठों और विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई।
7. विदेशी आक्रमण
हूण आक्रमण
- अनेक बौद्ध संस्थानों को नुकसान पहुँचा।
तुर्क आक्रमण
- बख्तियार खिलजी ने नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया।
परिणाम
बौद्ध शिक्षा केंद्र समाप्त हो गए।
बौद्ध धर्म का योगदान
बौद्ध धर्म ने भारतीय समाज, संस्कृति, कला, शिक्षा एवं राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला।
1. सामाजिक योगदान
समानता का सिद्धांत
- जाति व्यवस्था का विरोध।
- सभी वर्गों को समान महत्व।
महिलाओं की स्थिति
- महिलाओं को संघ में प्रवेश दिया गया।
- महाप्रजापति गौतमी पहली भिक्षुणी बनीं।
नैतिक जीवन
- सत्य
- अहिंसा
- करुणा
- दया
पर बल दिया गया।
2. धार्मिक योगदान
अहिंसा का प्रचार
- पशुबलि का विरोध।
- सभी जीवों के प्रति दया।
नैतिकता
- अच्छे आचरण पर बल।
- कर्म आधारित जीवन।
3. शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
बौद्ध धर्म ने विश्व के महान विश्वविद्यालयों की स्थापना की।
नालंदा विश्वविद्यालय
स्थान
- बिहार
संस्थापक
- कुमारगुप्त प्रथम (गुप्त वंश)
विशेषताएँ
- विश्व का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय।
- लगभग 10,000 विद्यार्थी।
- लगभग 2,000 शिक्षक।
विदेशी यात्री
- ह्वेनसांग
- इत्सिंग
ने यहाँ अध्ययन किया।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय
संस्थापक
- धर्मपाल (पाल वंश)
स्थान
- बिहार
विशेषता
- वज्रयान बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र।
वल्लभी विश्वविद्यालय
स्थान
- गुजरात
विशेषता
- बौद्ध एवं ब्राह्मण दोनों प्रकार की शिक्षा।
तक्षशिला विश्वविद्यालय
स्थान
- वर्तमान पाकिस्तान
विशेषता
- विश्व का प्राचीनतम विश्वविद्यालय।
- चाणक्य, पाणिनि आदि से संबंधित।
साहित्य में योगदान
प्रमुख ग्रंथ
- त्रिपिटक
- जातक कथाएँ
- बुद्धचरित
- मिलिंदपन्हो
- दीपवंश
- महावंश
प्रभाव
- पाली भाषा का विकास।
- साहित्य को जनसामान्य तक पहुँचाया।
कला एवं वास्तुकला में योगदान
स्तूप
अर्थ
- बुद्ध या अन्य महान व्यक्तियों के अवशेषों पर निर्मित स्मारक।
सांची स्तूप
स्थान
- मध्य प्रदेश
निर्माता
- सम्राट अशोक
विशेषता
- भारत का सबसे प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप।
भरहुत स्तूप
स्थान
- मध्य प्रदेश
विशेषता
- उत्कृष्ट मूर्तिकला।
अमरावती स्तूप
स्थान
- आंध्र प्रदेश
विशेषता
- दक्षिण भारत का प्रसिद्ध स्तूप।
चैत्य
अर्थ
- बौद्ध प्रार्थना स्थल।
उदाहरण
- कार्ले चैत्य
- भाजा चैत्य
- अजंता चैत्य
विहार
अर्थ
- भिक्षुओं का निवास स्थान।
उपयोग
- शिक्षा
- साधना
- निवास
अजंता गुफाएँ
स्थान
- महाराष्ट्र
विशेषता
- भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध।
- यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।
एलोरा गुफाएँ
स्थान
- महाराष्ट्र
विशेषता
- बौद्ध, हिन्दू और जैन गुफाओं का समूह।
गांधार कला शैली
क्षेत्र
- अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान
विशेषताएँ
- यूनानी प्रभाव।
- बुद्ध की प्रथम मानव आकृतियाँ।
निर्माण सामग्री
- धूसर पत्थर (Grey Stone)
मथुरा कला शैली
क्षेत्र
- उत्तर प्रदेश
विशेषताएँ
- भारतीय शैली।
- लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग।
महत्व
- बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण।
अंतरराष्ट्रीय योगदान
बौद्ध धर्म ने भारतीय संस्कृति को विश्वभर में पहुँचाया।
जिन देशों में प्रभाव पड़ा
- श्रीलंका
- चीन
- जापान
- कोरिया
- म्यांमार
- थाईलैंड
- कंबोडिया
- वियतनाम
- मंगोलिया
- तिब्बत
परीक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य
नालंदा विश्वविद्यालय के संस्थापक
➡️ कुमारगुप्त प्रथम
विक्रमशिला विश्वविद्यालय के संस्थापक
➡️ धर्मपाल
सांची स्तूप के निर्माता
➡️ अशोक
बुद्ध की प्रथम मानव प्रतिमा
➡️ गांधार शैली
लाल बलुआ पत्थर
➡️ मथुरा शैली
बख्तियार खिलजी ने नष्ट किया
➡️ नालंदा एवं विक्रमशिला
अजंता किसके लिए प्रसिद्ध है?
➡️ भित्ति चित्र
चैत्य क्या है?
➡️ प्रार्थना स्थल
विहार क्या है?
➡️ भिक्षुओं का निवास
सम्पूर्ण बौद्ध धर्म – एक पृष्ठीय सारांश
संस्थापक
- गौतम बुद्ध
जन्म
- 563 ईसा पूर्व
- लुंबिनी
पिता
- शुद्धोधन
माता
- महामाया
कुल
- शाक्य
गृह त्याग
- 29 वर्ष
- महाभिनिष्क्रमण
ज्ञान प्राप्ति
- बोधगया
- 35 वर्ष की आयु
प्रथम उपदेश
- सारनाथ
- धर्मचक्र प्रवर्तन
महापरिनिर्वाण
- कुशीनगर
- 483 ईसा पूर्व
मुख्य सिद्धांत
- चार आर्य सत्य
- अष्टांगिक मार्ग
- मध्यम मार्ग
- पंचशील
त्रिरत्न
- बुद्ध
- धम्म
- संघ
प्रमुख ग्रंथ
- त्रिपिटक
- जातक कथाएँ
- बुद्धचरित
- मिलिंदपन्हो
प्रमुख शाखाएँ
- महायान
- हीनयान
- थेरवाद
- वज्रयान
- जेन
प्रमुख विश्वविद्यालय
- नालंदा
- विक्रमशिला
- तक्षशिला
- वल्लभी
प्रमुख कला शैलियाँ
- गांधार
- मथुरा
प्रमुख स्मारक
- सांची स्तूप
- अजंता
- एलोरा
Vitorr Classes Exam Booster
SSC, Railway, UPSC, State PSC, CDS, CAPF तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बौद्ध धर्म से सबसे अधिक प्रश्न निम्न विषयों से पूछे जाते हैं:
- चार बौद्ध संगीतियाँ
- चार आर्य सत्य
- अष्टांगिक मार्ग
- त्रिपिटक
- महायान एवं हीनयान
- नालंदा एवं विक्रमशिला
- गांधार एवं मथुरा कला
- बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाएँ
- बौद्ध धर्म के प्रतीक
- बौद्ध धर्म के पतन के कारण