GK AND GS FOR ALL COMPETITIVE EXAMS ONE LINER | HINDI MEDIUM

प्राचीन इतिहास का विभाजन (Ancient History Division) – एक पंक्ति में

  • प्रागैतिहासिक काल (Pre-Historic Period) – वह काल जब लिखित अभिलेख उपलब्ध नहीं थे।
  • पुरापाषाण काल (Palaeolithic Age) – मानव पत्थर के औजारों का उपयोग करता था।
  • निम्न/प्रारम्भिक पुरापाषाण काल (Lower Palaeolithic) – मानव जीवन का प्रारम्भिक शिकारी-संग्रहकर्ता चरण।
  • मध्य पुरापाषाण काल (Middle Palaeolithic) – अधिक विकसित पत्थर के औजारों का प्रयोग हुआ।
  • उच्च पुरापाषाण काल (Upper Palaeolithic) – कला एवं गुफा चित्रों का विकास हुआ।
  • मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age) – सूक्ष्म पत्थर के औजार (Microliths) का प्रयोग प्रारम्भ हुआ।
  • नवपाषाण काल (Neolithic Age) – कृषि, पशुपालन, अग्नि और पहिए का विकास हुआ।
  • आद्य-ऐतिहासिक काल (Proto-Historic Period) – लिखित प्रमाण सीमित एवं अपठित अवस्था में मिले।
  • सिंधु घाटी सभ्यता (2600–1700 ई.पू.) – कांस्य युग की विकसित नगरीय सभ्यता।
  • वैदिक सभ्यता – आर्यों के आगमन के बाद विकसित भारतीय सभ्यता।
  • ऋग्वैदिक काल (1500–1000 ई.पू.) – वैदिक सभ्यता का प्रारम्भिक चरण।
  • उत्तर वैदिक काल (1000–600 ई.पू.) – कृषि, राज्य और सामाजिक व्यवस्था का विस्तार हुआ।
  • ऐतिहासिक काल (Historical Period) – लिखित अभिलेखों के आधार पर ज्ञात इतिहास।
  • प्राचीन भारत का इतिहास – प्रारम्भिक सभ्यताओं से गुप्तकाल तक का इतिहास।
  • मध्यकालीन भारत का इतिहास – लगभग 8वीं से 18वीं शताब्दी तक का इतिहास।
  • आधुनिक भारत का इतिहास – यूरोपीय आगमन से स्वतंत्रता तक का इतिहास।

प्रमुख पुरातात्विक स्थल एवं खोजें (One Liners)

  • भीमबेटका (पुरापाषाण काल) – गुफा चित्रों के लिए प्रसिद्ध।
  • सराय नाहर राय, महदाहा (मध्यपाषाण काल) – मानव कंकाल के अवशेष प्राप्त हुए।
  • चोपानी माण्डो (मध्यपाषाण काल) – चावल और मिट्टी के बर्तनों के प्रमाण मिले।
  • आदमगढ़, बागोर (मध्यपाषाण काल) – पशुपालन के प्रारम्भिक प्रमाण मिले।
  • कोल्डीहवा (नवपाषाण काल) – चावल की खेती के सबसे प्राचीन प्रमाण मिले।
  • बुर्जहोम (नवपाषाण काल) – मानव और कुत्ते का संयुक्त दफन मिला।
  • चिरांद (नवपाषाण काल) – हिरण के सींगों से बने औजार प्राप्त हुए।
  • पिकलीहल एवं उत्तनूर (नवपाषाण काल) – राख के टीले (Ash Mounds) मिले।

सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल – एक पंक्ति में

  • हड़प्पा (पंजाब, पाकिस्तान) – दयाराम साहनी द्वारा 1921 में खोजा गया; विशाल अन्नागार, कब्र R-37 तथा नृत्य मुद्रा वाला धड़ मिला।
  • मोहनजोदड़ो (सिंध, पाकिस्तान) – आर. डी. बनर्जी द्वारा 1922 में खोजा गया; महान स्नानागार, कांस्य नर्तकी तथा पशुपति मुहर के लिए प्रसिद्ध।
  • लोथल (अहमदाबाद, गुजरात) – एस. आर. राव द्वारा 1955 में खोजा गया; गोदीवाड़ा (Dockyard), मनका उद्योग तथा हाथीदांत पैमाना मिला।
  • धौलावीरा (कच्छ, गुजरात) – आर. एस. बिष्ट एवं जे. पी. जोशी द्वारा खोजा गया; जल प्रबंधन प्रणाली और 10 प्रतीकों वाला शिलालेख मिला।
  • कालीबंगन (हनुमानगढ़, राजस्थान) – बी. बी. लाल एवं बी. के. थापड़ द्वारा 1961 में खोजा गया; जुते हुए खेत और भूकम्प के प्रमाण मिले।
  • राखीगढ़ी (हिसार, हरियाणा) – भारत का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल; टेराकोटा पहिया और खिलौने प्राप्त हुए।
  • बनावली (फतेहाबाद, हरियाणा) – आर. एस. बिष्ट द्वारा खोजा गया; मिट्टी के हल का नमूना प्राप्त हुआ।
  • रोपड़ (पंजाब) – यज्ञदत्त शर्मा द्वारा खोजा गया; कुत्ते के साथ मानव दफनाने के प्रमाण मिले।

SSC/Railway One-Liners

  • हड़प्पा की खोज – दयाराम साहनी (1921)
  • मोहनजोदड़ो की खोज – आर. डी. बनर्जी (1922)
  • लोथल की खोज – एस. आर. राव (1955)
  • धौलावीरा की खोज – आर. एस. बिष्ट
  • कालीबंगन की खोज – बी. बी. लाल एवं बी. के. थापड़
  • भारत का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल – राखीगढ़ी
  • गोदीवाड़ा (Dockyard) वाला स्थल – लोथल
  • महान स्नानागार वाला स्थल – मोहनजोदड़ो
  • जुते हुए खेत का प्रमाण – कालीबंगन
  • उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली – धौलावीरा
  • कुत्ते के साथ दफनाने का प्रमाण – रोपड़
  • टेराकोटा पहिया प्राप्त स्थल – राखीगढ़ी
  • मिट्टी के हल का प्रमाण – बनावली
  • विशाल अन्नागार के लिए प्रसिद्ध स्थल – हड़प्पा
  • कांस्य नर्तकी की मूर्ति प्राप्त स्थल – मोहनजोदड़ो

सिंधु घाटी सभ्यता में आयातित वस्तुएँ – एक पंक्ति में

  • चाँदी (Silver) – राजस्थान के जावर-अजमेर, अफगानिस्तान और ईरान से आयात की जाती थी।
  • टिन (Tin) – मध्य एशिया, ईरान और अफगानिस्तान से प्राप्त किया जाता था।
  • फ़िरोज़ा (Turquoise) – ईरान से आयात किया जाता था।
  • लाजवर्द (Lapis Lazuli) – बदख्शां (अफगानिस्तान) और मेसोपोटामिया से लाया जाता था।
  • ताँबा (Copper) – राजस्थान के खेतड़ी तथा बलूचिस्तान से प्राप्त किया जाता था।
  • सीसा (Lead) – दक्षिण भारत, अफगानिस्तान, ईरान और राजस्थान से प्राप्त होता था।
  • गोमेद (Hessonite Garnet) – सौराष्ट्र (गुजरात) से प्राप्त होता था।

सिंधु घाटी सभ्यता के नगर एवं नदियाँ – एक पंक्ति में

  • हड़प्पा – रावी नदी के तट पर स्थित था।
  • मोहनजोदड़ो – सिंधु नदी के तट पर स्थित था।
  • कालीबंगन – घग्घर नदी के तट पर स्थित था।
  • लोथल – भोगावा नदी के तट पर स्थित था।
  • राखीगढ़ी – घग्घर नदी के तट पर स्थित था।
  • बनावली – प्राचीन सरस्वती नदी के तट पर स्थित था।
  • कोट दीजी – सिंधु नदी के तट पर स्थित था।
  • दायमाबाद – प्रवरा नदी के तट पर स्थित था।
  • सुतकोटा कोह – शादी कौर नदी के तट पर स्थित था।
  • आलमगीरपुर – हिंडन नदी के तट पर स्थित था।
  • अमरी – सिंधु नदी के तट पर स्थित था।
  • भगवानपुरा – सरस्वती नदी के तट पर स्थित था।
  • कुनाल – सिंधु नदी के तट पर स्थित था।
  • चन्हूदड़ो – सिंधु नदी के तट पर स्थित था।
  • मांडा – चिनाब नदी के तट पर स्थित था।
  • रोपड़ – सतलुज नदी के तट पर स्थित था।
  • रंगपुर – मदार नदी के तट पर स्थित था।
  • सुत्कागेंडोर – दाश्क नदी के तट पर स्थित था।

SSC/Railway Quick Revision

  • लाजवर्द का प्रमुख स्रोत – बदख्शां (अफगानिस्तान)
  • ताँबे का प्रमुख स्रोत – खेतड़ी (राजस्थान)
  • फ़िरोज़ा कहाँ से आता था? – ईरान
  • लोथल किस नदी पर था? – भोगावा
  • मोहनजोदड़ो किस नदी पर था? – सिंधु
  • हड़प्पा किस नदी पर था? – रावी
  • कालीबंगन किस नदी पर था? – घग्घर
  • रोपड़ किस नदी पर था? – सतलुज
  • आलमगीरपुर किस नदी पर था? – हिंडन
  • मांडा किस नदी पर था? – चिनाब
  • सुत्कागेंडोर किस नदी पर था? – दाश्क
  • बनावली किस नदी पर था? – प्राचीन सरस्वती।

वैदिक काल (Vedic Period) – एक पंक्ति में

  • वैदिक आर्यों की भाषा – संस्कृत थी।
  • वेदों की कुल संख्या – चार है।
  • वेदों का संकलन – महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने किया।
  • वेद अपौरुषेय हैं – अर्थात मनुष्य द्वारा रचित नहीं, ईश्वर प्रदत्त माने जाते हैं।
  • वेद प्रारम्भ में – श्रुति परंपरा द्वारा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाए गए।
  • सबसे प्राचीन वेद – ऋग्वेद है।
  • ऋग्वेद में मंडलों की संख्या – 10 है।
  • ऋग्वेद के सबसे प्राचीन मंडल – द्वितीय से सप्तम मंडल हैं।
  • ऋग्वेद का दसवाँ मंडल – पुरुष सूक्त का उल्लेख करता है।
  • बोगाज़कोई अभिलेख में वर्णित वैदिक देवता – इन्द्र, वरुण, मित्र और नासत्य हैं।
  • ऋग्वैदिक काल के प्रमुख देवता – इन्द्र और अग्नि थे।
  • ऋग्वेद में इन्द्र का उल्लेख – लगभग 250 सूक्तों में मिलता है।
  • ऋग्वेद में अग्नि का उल्लेख – लगभग 200 सूक्तों में मिलता है।

चार वेद – एक पंक्ति में

ऋग्वेद (Rigveda)

  • उपवेद – आयुर्वेद।
  • ऋत्विज (पुरोहित) – होतृ (Hotri)।
  • विषयवस्तु – ऋचाओं (स्तुतियों) का संकलन।
  • सबसे प्राचीन वेद – ऋग्वेद।

यजुर्वेद (Yajurveda)

  • उपवेद – धनुर्वेद।
  • ऋत्विज (पुरोहित) – अध्वर्यु (Adhvaryu)।
  • विषयवस्तु – यज्ञ एवं कर्मकाण्ड संबंधी मंत्र।

सामवेद (Samaveda)

  • उपवेद – गंधर्ववेद।
  • ऋत्विज (पुरोहित) – उद्गाता (Udgatri)।
  • विषयवस्तु – गायन एवं संगीत संबंधी मंत्र।
  • भारतीय संगीत का आधार – सामवेद को माना जाता है।

अथर्ववेद (Atharvaveda)

  • उपवेद – शिल्पवेद।
  • ऋत्विज (पुरोहित) – ब्रह्मा।
  • विषयवस्तु – तंत्र-मंत्र, रोग निवारण एवं लोकजीवन संबंधी विषय।

SSC/Railway Quick Revision

  • सबसे प्राचीन वेद – ऋग्वेद।
  • संगीत का वेद – सामवेद।
  • चिकित्सा का उपवेद – आयुर्वेद।
  • युद्धकला का उपवेद – धनुर्वेद।
  • संगीत का उपवेद – गंधर्ववेद।
  • शिल्पकला का उपवेद – शिल्पवेद।
  • ऋग्वेद के पुरोहित – होतृ।
  • यजुर्वेद के पुरोहित – अध्वर्यु।
  • सामवेद के पुरोहित – उद्गाता।
  • अथर्ववेद के पुरोहित – ब्रह्मा।
  • वेदों के संकलनकर्ता – वेदव्यास।
  • ऋग्वेद में मंडल – 10।
  • ऋग्वेद के प्रमुख देवता – इन्द्र एवं अग्नि।

ऋग्वेद के मंडल (Mandalas of Rigveda) – एक पंक्ति में

प्रथम मंडल

  • ऋषि – मधुच्छंद, मेधातिथि गौतम आदि।
  • विशेषता – अग्नि और इन्द्र देवता की स्तुतियाँ।

द्वितीय मंडल

  • ऋषि – गृत्समद।
  • विशेषता – अग्नि एवं इन्द्र की स्तुतियाँ।

तृतीय मंडल

  • ऋषि – विश्वामित्र।
  • विशेषता – प्रसिद्ध गायत्री मंत्र का उल्लेख मिलता है।

चतुर्थ मंडल

  • ऋषि – वामदेव।
  • विशेषता – कृषि संबंधी मंत्रों का वर्णन मिलता है।

पंचम मंडल

  • ऋषि – अत्रि।
  • विशेषता – सोम देवता की स्तुतियाँ मिलती हैं।

षष्ठ मंडल

  • ऋषि – भारद्वाज।
  • विशेषता – अग्नि एवं सोम देवता की स्तुतियाँ मिलती हैं।

सप्तम मंडल

  • ऋषि – वशिष्ठ।
  • विशेषता – दशराज्ञ युद्ध (Battle of Ten Kings) का वर्णन मिलता है।

अष्टम मंडल

  • ऋषि – कण्व एवं अंगिरस।
  • विशेषता – विभिन्न देवताओं की स्तुतियाँ मिलती हैं।

नवम मंडल

  • ऋषि – विभिन्न ऋषि।
  • विशेषता – सोम मंडल के नाम से प्रसिद्ध है।

दशम मंडल

  • ऋषि – विमद, इन्द्र, शची आदि।
  • विशेषता – पुरुष सूक्त का वर्णन मिलता है।

SSC/Railway Quick Revision

  • गायत्री मंत्र – तृतीय मंडल (विश्वामित्र)।
  • दशराज्ञ युद्ध – सप्तम मंडल (वशिष्ठ)।
  • सोम मंडल – नवम मंडल।
  • पुरुष सूक्त – दशम मंडल।
  • कृषि संबंधी मंत्र – चतुर्थ मंडल।
  • गृत्समद – द्वितीय मंडल।
  • विश्वामित्र – तृतीय मंडल।
  • वामदेव – चतुर्थ मंडल।
  • अत्रि – पंचम मंडल।
  • भारद्वाज – षष्ठ मंडल।
  • वशिष्ठ – सप्तम मंडल।
  • कण्व एवं अंगिरस – अष्टम मंडल।

वेदों की शाखाएँ, ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद – एक पंक्ति में

ऋग्वेद (Rigveda)

  • ऋग्वेद की प्रमुख शाखाएँ – शांखायन (कौषीतकि) एवं ऐतरेय हैं।
  • ऋग्वेद का ब्राह्मण ग्रंथ – ऐतरेय ब्राह्मण और कौषीतकि ब्राह्मण हैं।
  • ऋग्वेद का आरण्यक – ऐतरेय आरण्यक और कौषीतकि आरण्यक हैं।
  • ऋग्वेद के उपनिषद – ऐतरेय उपनिषद और कौषीतकि उपनिषद हैं।
  • ऐतरेय ब्राह्मण – राजसूय यज्ञ तथा सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग का वर्णन करता है।

यजुर्वेद (Yajurveda)

कृष्ण यजुर्वेद

  • कृष्ण यजुर्वेद की शाखाएँ – काठक, कपिष्ठल, मैत्रायणी एवं तैत्तिरीय हैं।
  • कृष्ण यजुर्वेद का ब्राह्मण – तैत्तिरीय ब्राह्मण है।
  • कृष्ण यजुर्वेद का आरण्यक – तैत्तिरीय एवं मैत्रायणी आरण्यक हैं।
  • कृष्ण यजुर्वेद के उपनिषद – तैत्तिरीय, मैत्रायणी, श्वेताश्वतर एवं कठोपनिषद हैं।

शुक्ल यजुर्वेद

  • शुक्ल यजुर्वेद की शाखाएँ – काण्व और माध्यंदिन हैं।
  • शुक्ल यजुर्वेद का ब्राह्मण – शतपथ ब्राह्मण है।
  • शुक्ल यजुर्वेद का आरण्यक – बृहदारण्यक है।
  • शुक्ल यजुर्वेद के उपनिषद – ईशोपनिषद एवं बृहदारण्यक उपनिषद हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • "तमसो मा ज्योतिर्गमय" – बृहदारण्यक उपनिषद से लिया गया है।
  • याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी संवाद – शतपथ ब्राह्मण में मिलता है।
  • याज्ञवल्क्य और गार्गी संवाद – बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित है।
  • नचिकेता और यमराज संवाद – कठोपनिषद में मिलता है।
  • तैत्तिरीय उपनिषद – महिलाओं को यज्ञोपवीत धारण करने का अधिकार बताता है।

सामवेद (Samaveda)

  • सामवेद की शाखाएँ – कौथुम, राणायनीय और जैमिनीय हैं।
  • सामवेद के ब्राह्मण ग्रंथ – पंचविंश, छांदोग्य, जैमिनीय एवं सद्विंश ब्राह्मण हैं।
  • सामवेद के आरण्यक – छांदोग्य एवं जैमिनीय आरण्यक हैं।
  • सामवेद के उपनिषद – छांदोग्य उपनिषद एवं केन उपनिषद हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • छांदोग्य उपनिषद – सबसे प्राचीन उपनिषद माना जाता है।
  • "कृष्ण" शब्द का प्रथम उल्लेख – छांदोग्य उपनिषद में मिलता है।
  • सत्यकाम जाबाल की कथा – छांदोग्य उपनिषद में वर्णित है।
  • उद्दालक अरुणि एवं श्वेतकेतु संवाद – छांदोग्य उपनिषद में मिलता है।
  • ब्रह्मचर्य, गृहस्थ एवं वानप्रस्थ आश्रम – छांदोग्य उपनिषद में वर्णित हैं।

अथर्ववेद (Atharvaveda)

  • अथर्ववेद की शाखाएँ – शौनक एवं पैप्पलाद हैं।
  • अथर्ववेद का ब्राह्मण – गोपथ ब्राह्मण है।
  • अथर्ववेद के प्रमुख उपनिषद – मुण्डक, माण्डूक्य एवं प्रश्न उपनिषद हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • "सत्यमेव जयते" – मुण्डक उपनिषद से लिया गया है।
  • सबसे छोटा उपनिषद – माण्डूक्य उपनिषद है।

SSC/Railway Quick Revision

  • सत्यमेव जयते – मुण्डक उपनिषद।
  • तमसो मा ज्योतिर्गमय – बृहदारण्यक उपनिषद।
  • नचिकेता–यम संवाद – कठोपनिषद।
  • याज्ञवल्क्य–गार्गी संवाद – बृहदारण्यक उपनिषद।
  • याज्ञवल्क्य–मैत्रेयी संवाद – शतपथ ब्राह्मण।
  • सबसे प्राचीन उपनिषद – छांदोग्य उपनिषद।
  • सबसे छोटा उपनिषद – माण्डूक्य उपनिषद।
  • कृष्ण शब्द का प्रथम उल्लेख – छांदोग्य उपनिषद।
  • सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर, कलियुग का वर्णन – ऐतरेय ब्राह्मण।
  • शतपथ ब्राह्मण – शुक्ल यजुर्वेद से संबंधित।
  • गोपथ ब्राह्मण – अथर्ववेद से संबंधित।

ऋग्वैदिक काल की नदियाँ – एक पंक्ति में

  • वितस्ता – वर्तमान झेलम नदी।
  • असिक्नी – वर्तमान चिनाब नदी।
  • परुष्णी – वर्तमान रावी नदी।
  • विपाशा – वर्तमान ब्यास नदी।
  • शुतुद्रि – वर्तमान सतलुज नदी।
  • सुवास्तु – वर्तमान स्वात नदी।
  • सदानीरा – वर्तमान गंडक नदी।
  • कुभा – वर्तमान काबुल नदी।
  • क्रमु – वर्तमान कुर्रम नदी।
  • गोमती – वर्तमान गोमल नदी।
  • दृषद्वती – वर्तमान घग्घर नदी।
  • सिंधु – वर्तमान इंडस (Indus) नदी।

16 संस्कार (षोडश संस्कार) – एक पंक्ति में

  • गर्भाधान – संतान प्राप्ति की कामना हेतु किया जाने वाला संस्कार।
  • पुंसवन – गर्भस्थ शिशु के कल्याण हेतु किया जाने वाला संस्कार।
  • सीमन्तोन्नयन – गर्भवती स्त्री की सुरक्षा एवं मंगल हेतु संस्कार।
  • जातकर्म – शिशु के जन्म के तुरंत बाद किया जाने वाला संस्कार।
  • नामकरण – शिशु का नाम रखने का संस्कार।
  • निष्क्रमण – शिशु को पहली बार घर से बाहर ले जाने का संस्कार।
  • अन्नप्राशन – शिशु को पहली बार अन्न खिलाने का संस्कार।
  • चूड़ाकर्म (मुंडन) – बालों के प्रथम मुंडन का संस्कार।
  • कर्णवेध – कान छेदन का संस्कार।
  • विद्यारम्भ – शिक्षा प्रारम्भ करने का संस्कार।
  • उपनयन – यज्ञोपवीत धारण कर शिक्षा ग्रहण करने का संस्कार।
  • वेदारम्भ – वेदों के अध्ययन का संस्कार।
  • केशान्त – शिक्षा काल में प्रथम दाढ़ी-मूंछ कटवाने का संस्कार।
  • समावर्तन – गुरुकुल शिक्षा पूर्ण होने का संस्कार।
  • विवाह – गृहस्थ जीवन में प्रवेश का संस्कार।
  • अन्त्येष्टि – मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार।

हिन्दू विवाह के आठ प्रकार – एक पंक्ति में

  • ब्रह्म विवाह – योग्य वर को कन्या का दान करना।
  • दैव विवाह – यज्ञ करने वाले पुरोहित को कन्या देना।
  • आर्ष विवाह – गौ एवं बैल लेकर कन्या का विवाह करना।
  • प्राजापत्य विवाह – धर्म पालन की प्रतिज्ञा के साथ विवाह।
  • असुर विवाह – कन्या के बदले धन देकर विवाह करना।
  • गान्धर्व विवाह – प्रेम विवाह।
  • राक्षस विवाह – बलपूर्वक कन्या का हरण कर विवाह करना।
  • पैशाच विवाह – छल या अचेत अवस्था में विवाह करना।

SSC/Railway Quick Revision

  • दशराज्ञ युद्ध किस नदी के तट पर हुआ? – परुष्णी (रावी)।
  • वितस्ता का आधुनिक नाम – झेलम।
  • असिक्नी का आधुनिक नाम – चिनाब।
  • विपाशा का आधुनिक नाम – ब्यास।
  • शुतुद्रि का आधुनिक नाम – सतलुज।
  • दृषद्वती का आधुनिक नाम – घग्घर।
  • कुभा का आधुनिक नाम – काबुल।
  • प्रेम विवाह का वैदिक नाम – गान्धर्व विवाह।
  • सबसे श्रेष्ठ विवाह – ब्रह्म विवाह।
  • बलपूर्वक विवाह – राक्षस विवाह।
  • धन देकर विवाह – असुर विवाह।
  • यज्ञोपवीत संस्कार – उपनयन।
  • पहली बार अन्न ग्रहण – अन्नप्राशन।
  • पहली शिक्षा का संस्कार – विद्यारम्भ।
  • गुरुकुल से वापसी का संस्कार – समावर्तन।

बौद्ध धर्म (Buddhism) – एक पंक्ति में

गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित तथ्य

  • बौद्ध धर्म के संस्थापक – गौतम बुद्ध थे।
  • गौतम बुद्ध का जन्म – 563 ईसा पूर्व में हुआ।
  • जन्म स्थान – लुम्बिनी (वर्तमान नेपाल)।
  • पिता – शुद्धोधन, शाक्य गण के प्रमुख।
  • माता – महामाया (माया देवी)।
  • बचपन का नाम – सिद्धार्थ।
  • पालन-पोषण – महाप्रजापति गौतमी ने किया।
  • पत्नी – यशोधरा।
  • पुत्र – राहुल।
  • गृह त्याग (महाभिनिष्क्रमण) – 29 वर्ष की आयु में किया।
  • ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण) – बोधगया में निरंजना नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे हुई।
  • प्रथम उपदेश – सारनाथ के मृगदाव (हिरण उद्यान) में दिया।
  • बौद्ध संघ की प्रथम महिला सदस्य – महाप्रजापति गौतमी।
  • महापरिनिर्वाण (मृत्यु) – 483 ईसा पूर्व में हुआ।
  • मृत्यु स्थान – कुशीनगर (मल्ल गणराज्य की राजधानी)।
  • उपदेशों की भाषा – पाली।

बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रतीक

  • जन्म – कमल (Lotus) एवं बैल (Bull)।
  • महाभिनिष्क्रमण (गृह त्याग) – घोड़ा।
  • निर्वाण (ज्ञान प्राप्ति) – पीपल/बोधि वृक्ष।
  • धर्मचक्र प्रवर्तन (प्रथम उपदेश) – धर्मचक्र (Wheel)।
  • महापरिनिर्वाण (मृत्यु) – स्तूप।

अष्टांगिक मार्ग (Eightfold Path)

  • सम्यक दृष्टि – सही समझ एवं सही विचार।
  • सम्यक संकल्प – सही उद्देश्य एवं संकल्प।
  • सम्यक वाचा – सत्य एवं उचित वाणी।
  • सम्यक कर्मान्त – अच्छे एवं नैतिक कर्म।
  • सम्यक आजीविका – उचित एवं ईमानदार जीविका।
  • सम्यक व्यायाम – सही प्रयास।
  • सम्यक स्मृति – सही जागरूकता।
  • सम्यक समाधि – सही एकाग्रता एवं ध्यान।

SSC/Railway Quick Revision

  • बौद्ध धर्म के संस्थापक – गौतम बुद्ध।
  • बुद्ध का जन्म – 563 ईसा पूर्व।
  • जन्म स्थान – लुम्बिनी।
  • बचपन का नाम – सिद्धार्थ।
  • पिता – शुद्धोधन।
  • माता – महामाया।
  • पत्नी – यशोधरा।
  • पुत्र – राहुल।
  • ज्ञान प्राप्ति – बोधगया।
  • प्रथम उपदेश – सारनाथ।
  • मृत्यु स्थान – कुशीनगर।
  • उपदेशों की भाषा – पाली।
  • बोधि वृक्ष – ज्ञान प्राप्ति का प्रतीक।
  • धर्मचक्र – प्रथम उपदेश का प्रतीक।
  • घोड़ा – महाभिनिष्क्रमण का प्रतीक।
  • स्तूप – महापरिनिर्वाण का प्रतीक।
  • बौद्ध धर्म का मूल मार्ग – अष्टांगिक मार्ग।

बौद्ध संगीति (Buddhist Councils) – एक पंक्ति में

प्रथम बौद्ध संगीति

  • वर्ष – 483 ईसा पूर्व।
  • स्थान – राजगृह (राजगीर)।
  • अध्यक्ष – महाकाश्यप।
  • शासक – अजातशत्रु।
  • उद्देश्य – बुद्ध के उपदेशों का संकलन।

द्वितीय बौद्ध संगीति

  • वर्ष – 383 ईसा पूर्व।
  • स्थान – वैशाली।
  • अध्यक्ष – सब्बकामी।
  • शासक – कालाशोक।
  • विशेषता – संघ में मतभेद प्रारम्भ हुए।

तृतीय बौद्ध संगीति

  • वर्ष – 250 ईसा पूर्व।
  • स्थान – पाटलिपुत्र।
  • अध्यक्ष – मोग्गलिपुत्त तिस्स।
  • शासक – अशोक।
  • विशेषता – बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु मिशन भेजे गए।

चतुर्थ बौद्ध संगीति

  • वर्ष – प्रथम शताब्दी ईस्वी।
  • स्थान – कुंडलवन (कश्मीर)।
  • अध्यक्ष – वसुमित्र।
  • उपाध्यक्ष – अश्वघोष।
  • शासक – कनिष्क।
  • विशेषता – महायान सम्प्रदाय को बढ़ावा मिला।

बौद्ध धर्म के सिद्धांत – एक पंक्ति में

  • कर्मवाद में विश्वास – बौद्ध धर्म कर्म के सिद्धांत को मानता है।
  • मोक्ष/निर्वाण में विश्वास – दुखों से मुक्ति को लक्ष्य मानता है।
  • वेदों का विरोध – वेदों की सर्वोच्चता को स्वीकार नहीं करता।
  • वैदिक कर्मकाण्डों का विरोध – यज्ञ एवं बलि प्रथा का विरोध करता है।
  • ईश्वर के अस्तित्व पर जोर नहीं – सृष्टिकर्ता ईश्वर की अवधारणा को महत्व नहीं देता।
  • आत्मा के स्थायी अस्तित्व को नहीं मानता – अनात्मवाद का सिद्धांत देता है।

त्रिपिटक (Tripitaka) – एक पंक्ति में

सुत्त पिटक

  • संकलक – आनंद।
  • विषय – बुद्ध के उपदेशों का संग्रह।

विनय पिटक

  • संकलक – उपाली।
  • विषय – भिक्षुओं एवं भिक्षुणियों के नियम।

अभिधम्म पिटक

  • संकलक – मोग्गलिपुत्त तिस्स।
  • विषय – बौद्ध दर्शन एवं सिद्धांत।
  • त्रिपिटक की भाषा – पाली।

बौद्ध धर्म की त्रिरत्न (Three Jewels)

  • बुद्ध – ज्ञान प्राप्त व्यक्ति।
  • धम्म (धर्म) – बुद्ध के उपदेश।
  • संघ – भिक्षुओं का समुदाय।

बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य (Four Noble Truths)

  • दुःख – जीवन दुःखमय है।
  • दुःख समुदय – तृष्णा दुःख का कारण है।
  • दुःख निरोध – तृष्णा का अंत दुःख का अंत है।
  • दुःख निरोधगामिनी प्रतिपदा – अष्टांगिक मार्ग से दुःख समाप्त होता है।

बौद्ध धर्म का विभाजन

हीनयान (Theravada)

  • उत्पत्ति – द्वितीय बौद्ध संगीति के बाद।
  • विशेषता – बुद्ध को महापुरुष मानता है।
  • भाषा – पाली।
  • प्रमुख क्षेत्र – श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड।

महायान

  • उत्पत्ति – चतुर्थ बौद्ध संगीति के बाद।
  • विशेषता – बुद्ध को ईश्वर समान मानता है।
  • भाषा – संस्कृत।
  • प्रमुख क्षेत्र – चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत।

SSC/Railway Quick Revision

  • प्रथम बौद्ध संगीति – राजगृह, अजातशत्रु।
  • द्वितीय बौद्ध संगीति – वैशाली, कालाशोक।
  • तृतीय बौद्ध संगीति – पाटलिपुत्र, अशोक।
  • चतुर्थ बौद्ध संगीति – कश्मीर, कनिष्क।
  • त्रिपिटक की भाषा – पाली।
  • विनय पिटक के संकलक – उपाली।
  • सुत्त पिटक के संकलक – आनंद।
  • अभिधम्म पिटक के संकलक – मोग्गलिपुत्त तिस्स।
  • बौद्ध धर्म के त्रिरत्न – बुद्ध, धम्म, संघ।
  • चार आर्य सत्य – दुःख, दुःख समुदय, दुःख निरोध, दुःख निरोधगामिनी प्रतिपदा।
  • महायान का संरक्षण – कनिष्क।
  • बौद्ध धर्म का प्रचारक सम्राट – अशोक।
  • महायान की भाषा – संस्कृत।
  • हीनयान की भाषा – पाली।

बौद्ध काल के प्रमुख गणराज्य (Important Republics of Buddhist Era) – एक पंक्ति में

  • वैशाली – लिच्छवि गणराज्य की राजधानी थी।
  • मिथिला – विदेह गणराज्य की राजधानी थी।
  • कुशीनगर – मल्ल गणराज्य की राजधानी थी।
  • पावा – मल्ल गणराज्य का प्रमुख नगर था।
  • रामग्राम – कोलिय गणराज्य की राजधानी थी।
  • कपिलवस्तु – शाक्य गणराज्य की राजधानी थी।
  • पिप्पलिवन – मोरिय गणराज्य की राजधानी थी।
  • अलकप्पा – बुलि गणराज्य की राजधानी थी।
  • केसपुत्त (केसपुत्र) – कालाम गणराज्य की राजधानी थी।
  • सुंसुमारगिरि – भग्ग गणराज्य की राजधानी थी।

जैन धर्म के 24 तीर्थंकर एवं उनके प्रतीक – एक पंक्ति में

1 से 12 तीर्थंकर

  • ऋषभदेव (आदिनाथ) – प्रतीक : बैल।
  • अजितनाथ – प्रतीक : हाथी।
  • संभवनाथ – प्रतीक : घोड़ा।
  • अभिनन्दननाथ – प्रतीक : बंदर।
  • सुमतिनाथ – प्रतीक : हंस।
  • पद्मप्रभु – प्रतीक : कमल।
  • सुपार्श्वनाथ – प्रतीक : स्वस्तिक।
  • चन्द्रप्रभु – प्रतीक : चंद्रमा।
  • पुष्पदंत (सुविधिनाथ) – प्रतीक : मगरमच्छ।
  • शीतलनाथ – प्रतीक : श्रीवत्स।
  • श्रेयांसनाथ – प्रतीक : गैंडा।
  • वासुपूज्य – प्रतीक : भैंसा।

13 से 24 तीर्थंकर

  • विमलनाथ – प्रतीक : वराह।
  • अनंतनाथ – प्रतीक : बाज (Falcon)।
  • धर्मनाथ – प्रतीक : वज्र।
  • शांतिनाथ – प्रतीक : हिरण।
  • कुंथुनाथ – प्रतीक : बकरा।
  • अरहनाथ – प्रतीक : मछली।
  • मल्लिनाथ – प्रतीक : कलश।
  • मुनिसुव्रतनाथ – प्रतीक : कछुआ।
  • नेमिनाथ – प्रतीक : शंख।
  • अरिष्टनेमि – प्रतीक : शंख।
  • पार्श्वनाथ – प्रतीक : सर्प।
  • महावीर स्वामी – प्रतीक : सिंह।

SSC/Railway Quick Revision

  • प्रथम जैन तीर्थंकर – ऋषभदेव (आदिनाथ)।
  • 24वें जैन तीर्थंकर – महावीर स्वामी।
  • पार्श्वनाथ का प्रतीक – सर्प।
  • महावीर का प्रतीक – सिंह।
  • ऋषभदेव का प्रतीक – बैल।
  • अजितनाथ का प्रतीक – हाथी।
  • नेमिनाथ का प्रतीक – शंख।
  • मल्लिनाथ का प्रतीक – कलश।
  • मुनिसुव्रतनाथ का प्रतीक – कछुआ।
  • शांतिनाथ का प्रतीक – हिरण।
  • सुपार्श्वनाथ का प्रतीक – स्वस्तिक।
  • चन्द्रप्रभु का प्रतीक – चंद्रमा।
  • पद्मप्रभु का प्रतीक – कमल।
  • वासुपूज्य का प्रतीक – भैंसा।
  • पुष्पदंत का प्रतीक – मगरमच्छ।

महावीर स्वामी – एक पंक्ति में परिचय

  • 24वें जैन तीर्थंकर – महावीर स्वामी थे।
  • जन्म वर्ष – 599 ईसा पूर्व।
  • जन्म स्थान – कुंडग्राम (वैशाली)।
  • पिता – सिद्धार्थ।
  • माता – त्रिशला।
  • वंश – ज्ञात्रिक (नाय) क्षत्रिय कुल।
  • नाना – चेटक, वैशाली के राजा।
  • बचपन का नाम – वर्धमान।
  • पत्नी – यशोदा।
  • पुत्री – प्रियदर्शना (अनोज्जा)।
  • जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर – महावीर स्वामी थे।
  • गृह त्याग – 30 वर्ष की आयु में किया।
  • कठोर तपस्या – 12 वर्ष तक की।
  • कैवल्य (ज्ञान) प्राप्ति – जृम्भिकग्राम के निकट ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे हुई।
  • प्रथम उपदेश – पावा में दिया।
  • उपदेशों की भाषा – प्राकृत (अर्धमागधी)।
  • निर्वाण (मृत्यु) – 527 ईसा पूर्व में पावापुरी (बिहार) में हुआ।

SSC/Railway Quick Revision

  • जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर – महावीर स्वामी।
  • महावीर का जन्म – 599 ईसा पूर्व।
  • महावीर का जन्म स्थान – कुंडग्राम (वैशाली)।
  • महावीर के पिता – सिद्धार्थ।
  • महावीर की माता – त्रिशला।
  • महावीर का बचपन का नाम – वर्धमान।
  • महावीर की पत्नी – यशोदा।
  • महावीर की पुत्री – प्रियदर्शना।
  • महावीर को कैवल्य ज्ञान कहाँ मिला? – ऋजुपालिका नदी के तट पर।
  • महावीर की उपदेश भाषा – अर्धमागधी।
  • महावीर का निर्वाण स्थल – पावापुरी।
  • महावीर का प्रतीक चिन्ह – सिंह।

जैन धर्म के त्रिरत्न (Triratnas of Jainism) – एक पंक्ति में

  • सम्यक दर्शन (Right Faith) – सत्य में सही आस्था रखना।
  • सम्यक ज्ञान (Right Knowledge) – वस्तुओं का सही ज्ञान प्राप्त करना।
  • सम्यक चरित्र (Right Conduct) – नैतिक एवं सदाचारी जीवन जीना।

जैन धर्म के पंच महाव्रत (Five Great Vows) – एक पंक्ति में

  • सत्य – सदैव सत्य बोलना।
  • अहिंसा – किसी भी जीव को कष्ट न पहुँचाना।
  • अस्तेय – चोरी न करना।
  • अपरिग्रह – आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना।
  • ब्रह्मचर्य – इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना।

जैन धर्म के प्रमुख सम्प्रदाय (Jain Sects) – एक पंक्ति में

श्वेताम्बर सम्प्रदाय

  • संस्थापक – स्थूलभद्र।
  • विशेषता – सफेद वस्त्र धारण करते हैं।
  • प्रमुख शाखाएँ – पूजेरा (देरावासी), ढूंढिया (स्थानकवासी), तेरापंथी, बीसपंथी एवं तोतापंथी।

दिगम्बर सम्प्रदाय

  • संस्थापक – भद्रबाहु।
  • विशेषता – नग्नता को त्याग और वैराग्य का प्रतीक मानते हैं।
  • प्रमुख शाखाएँ – तेरापंथी, गुमानपंथी आदि।

जैन धर्म के सिद्धांत (Beliefs of Jainism) – एक पंक्ति में

  • अपरिग्रह का सिद्धांत – वेदों की सर्वोच्चता को स्वीकार नहीं करता।
  • ईश्वर में विश्वास नहीं – सृष्टिकर्ता ईश्वर की अवधारणा को नहीं मानता।
  • आत्मा में विश्वास – प्रत्येक जीव में आत्मा के अस्तित्व को मानता है।
  • कर्म सिद्धांत में विश्वास – कर्म के अनुसार फल मिलने को स्वीकार करता है।

जैन संगीति (Jain Councils) – एक पंक्ति में

प्रथम जैन संगीति

  • वर्ष – 300 ईसा पूर्व।
  • स्थान – पाटलिपुत्र।
  • अध्यक्ष – स्थूलभद्र।

द्वितीय जैन संगीति

  • वर्ष – 512 ईस्वी।
  • स्थान – वल्लभी।
  • अध्यक्ष – देवर्धिगणि क्षमाश्रमण।

भारतीय दर्शन के प्रमुख प्रवर्तक – एक पंक्ति में

  • सांख्य दर्शन – कपिल मुनि।
  • योग दर्शन – पतंजलि।
  • न्याय दर्शन – गौतम।
  • वैशेषिक दर्शन – कणाद।
  • पूर्व मीमांसा दर्शन – जैमिनि।
  • उत्तर मीमांसा (वेदांत) दर्शन – बादरायण।

SSC/Railway Quick Revision

  • जैन धर्म के त्रिरत्न – सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र।
  • जैन धर्म के पंच महाव्रत – सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य।
  • श्वेताम्बर सम्प्रदाय के संस्थापक – स्थूलभद्र।
  • दिगम्बर सम्प्रदाय के संस्थापक – भद्रबाहु।
  • प्रथम जैन संगीति – पाटलिपुत्र, 300 ईसा पूर्व।
  • द्वितीय जैन संगीति – वल्लभी, 512 ईस्वी।
  • सांख्य दर्शन के प्रवर्तक – कपिल।
  • योग दर्शन के प्रवर्तक – पतंजलि।
  • न्याय दर्शन के प्रवर्तक – गौतम।
  • वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक – कणाद।
  • पूर्व मीमांसा के प्रवर्तक – जैमिनि।
  • वेदांत दर्शन के प्रवर्तक – बादरायण।

महाजनपद काल (Mahajanapada Period) – एक पंक्ति में

  • छठी शताब्दी ईसा पूर्व में छोटे-छोटे जनपद मिलकर महाजनपद बने।
  • बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।
  • जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में भी 16 महाजनपदों का वर्णन मिलता है।

16 महाजनपद – एक पंक्ति में

1. अंग (Anga)

  • राजधानी – चम्पा (मुंगेर/भागलपुर क्षेत्र)।

2. अश्मक (Assaka)

  • राजधानी – पोतलि (पैठन)।

3. अवन्ति (Avanti)

  • उत्तरी राजधानी – उज्जयिनी।
  • दक्षिणी राजधानी – महिष्मती।

4. गांधार (Gandhara)

  • राजधानी – तक्षशिला।

5. कम्बोज (Kamboja)

  • राजधानी – राजपुर/हाटक।

6. मगध (Magadha)

  • राजधानी – राजगृह।

7. मत्स्य (Matsya)

  • राजधानी – विराटनगर।

8. वज्जि (Vrijji)

  • राजधानी – वैशाली।

9. चेदि (Chedi)

  • राजधानी – सुक्तिमती।

10. काशी (Kashi)

  • राजधानी – वाराणसी।

11. कोशल (Kosala)

  • राजधानी – श्रावस्ती।

12. कुरु (Kuru)

  • राजधानी – इन्द्रप्रस्थ।

13. मल्ल (Malla)

  • राजधानी – कुशीनगर।

14. पांचाल (Panchala)

  • राजधानी – अहिच्छत्र।

15. शूरसेन (Surasena)

  • राजधानी – मथुरा।

16. वत्स (Vatsa)

  • राजधानी – कौशाम्बी।

जैन धर्म – त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)

  • जैन धर्म ईश्वर को सृष्टिकर्ता नहीं मानता।
  • जैन धर्म आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करता है।
  • जैन धर्म कर्म और पुनर्जन्म में विश्वास करता है।
  • वेदों की सर्वोच्चता को स्वीकार नहीं करता।

जैन संगीति – एक पंक्ति में

  • प्रथम जैन संगीति – 300 ईसा पूर्व, पाटलिपुत्र, अध्यक्ष स्थूलभद्र।
  • द्वितीय जैन संगीति – 512 ईस्वी, वल्लभी, अध्यक्ष देवर्धिगणि।

भारतीय दर्शन एवं प्रवर्तक – एक पंक्ति में

  • सांख्य दर्शन – कपिल।
  • योग दर्शन – पतंजलि।
  • न्याय दर्शन – गौतम।
  • वैशेषिक दर्शन – कणाद।
  • पूर्व मीमांसा – जैमिनि।
  • उत्तर मीमांसा (वेदांत) – बादरायण।

SSC/Railway Quick Revision

  • 16 महाजनपदों का उल्लेख – अंगुत्तर निकाय।
  • मगध की राजधानी – राजगृह।
  • वज्जि की राजधानी – वैशाली।
  • काशी की राजधानी – वाराणसी।
  • कोशल की राजधानी – श्रावस्ती।
  • कुरु की राजधानी – इन्द्रप्रस्थ।
  • मल्ल की राजधानी – कुशीनगर।
  • पांचाल की राजधानी – अहिच्छत्र।
  • शूरसेन की राजधानी – मथुरा।
  • वत्स की राजधानी – कौशाम्बी।
  • गांधार की राजधानी – तक्षशिला।
  • अवन्ति की राजधानी – उज्जयिनी एवं महिष्मती।
  • अश्मक की राजधानी – पोतलि।
  • अंग की राजधानी – चम्पा।

मगध के राजवंश (Dynasties of Magadha) – एक पंक्ति में

  • हर्यंक वंश – 544 ईसा पूर्व से 413 ईसा पूर्व तक शासन किया।
  • शिशुनाग वंश – 412 ईसा पूर्व से 344 ईसा पूर्व तक शासन किया।
  • नंद वंश – 344 ईसा पूर्व से 321 ईसा पूर्व तक शासन किया।
  • मौर्य वंश – 321 ईसा पूर्व से 184 ईसा पूर्व तक शासन किया।
  • शुंग वंश – 184 ईसा पूर्व से 75 ईसा पूर्व तक शासन किया।
  • कण्व वंश – 73 ईसा पूर्व से 28 ईसा पूर्व तक शासन किया।

मौर्य साम्राज्य (Maurya Empire) – एक पंक्ति में

  • मौर्य साम्राज्य के संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य थे।
  • मौर्य वंश का अंतिम शासक – बृहद्रथ था।
  • चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता – मौर्य कुल से संबंधित थे।
  • चन्द्रगुप्त मौर्य ने – 298 ईसा पूर्व में राजपाट त्याग दिया।
  • चन्द्रगुप्त मौर्य – जैन आचार्य भद्रबाहु के शिष्य बने।
  • चन्द्रगुप्त मौर्य – श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) चले गए।
  • मौर्य शासकों में प्रमुख – चन्द्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार और अशोक थे।

मौर्य वंश के प्रमुख शासक

  • चन्द्रगुप्त मौर्य – मौर्य साम्राज्य के संस्थापक।
  • बिन्दुसार – चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र।
  • अशोक – बिन्दुसार के पुत्र एवं महान मौर्य सम्राट।
  • दशरथ – अशोक के उत्तराधिकारी।
  • सम्प्रति – जैन धर्म के संरक्षक माने जाते हैं।
  • शालिशुक – मौर्य वंश के उत्तरकालीन शासक।
  • देववर्मन – मौर्य वंश के शासक।
  • शतधन्वन – मौर्य वंश के शासक।
  • बृहद्रथ – मौर्य वंश का अंतिम शासक।

सम्राट अशोक (Ashoka) – एक पंक्ति में

  • अशोक का शासनकाल – 273 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व तक।
  • माता – सुभद्रांगी।
  • पिता – बिन्दुसार।
  • अशोक की उपाधियाँ – देवानांप्रिय एवं प्रियदर्शी।
  • राज्याभिषेक – 269 ईसा पूर्व में हुआ।
  • अभिलेखों की भाषा – प्राकृत।
  • अभिलेखों की लिपि – ब्राह्मी, खरोष्ठी, अरामाइक एवं यूनानी।
  • 'अशोक' नाम का उल्लेख – मास्की, गुर्जरा और उदेगोलम अभिलेखों में मिलता है।

अशोक के अभिलेखों का वर्गीकरण

शिलालेख (Rock Edicts)

  • 14 प्रमुख शिलालेख – अशोक के महत्वपूर्ण आदेशों का संग्रह।
  • लघु शिलालेख – छोटे आकार के अभिलेख।

स्तंभलेख (Pillar Edicts)

  • दिल्ली-टोपरा स्तंभलेख
  • दिल्ली-मेरठ स्तंभलेख
  • प्रयाग स्तंभलेख
  • लौरिया नंदनगढ़ स्तंभलेख
  • रामपुरवा स्तंभलेख

अशोक के 14 प्रमुख शिलालेख – एक पंक्ति में

प्रथम शिलालेख

  • पशु बलि एवं पशु वध पर प्रतिबंध

द्वितीय शिलालेख

  • मनुष्यों और पशुओं के लिए चिकित्सा व्यवस्था तथा चोल, पाण्ड्य आदि राज्यों का उल्लेख

तृतीय शिलालेख

  • धर्म प्रचार हेतु अधिकारियों को निर्देश

चतुर्थ शिलालेख

  • धम्म के प्रसार का वर्णन

पंचम शिलालेख

  • धर्म महामात्रों की नियुक्ति

षष्ठ शिलालेख

  • प्रजा के प्रति सम्राट की नीति का वर्णन

सप्तम शिलालेख

  • सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता का संदेश

अष्टम शिलालेख

  • धर्मयात्रा का उल्लेख

नवम शिलालेख

  • अनावश्यक कर्मकाण्डों की आलोचना

दशम शिलालेख

  • यश एवं कीर्ति से अधिक धम्म को महत्व

एकादश शिलालेख

  • धम्म की व्याख्या

द्वादश शिलालेख

  • धार्मिक सहिष्णुता एवं सभी सम्प्रदायों के सम्मान पर बल

त्रयोदश शिलालेख

  • कलिंग युद्ध और उसके पश्चात अशोक के पश्चाताप का वर्णन

चतुर्दश शिलालेख

  • विभिन्न स्थानों पर अभिलेखों की स्थापना का उल्लेख

SSC/Railway Quick Revision

  • मौर्य साम्राज्य के संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य।
  • मौर्य वंश का अंतिम शासक – बृहद्रथ।
  • अशोक के पिता – बिन्दुसार।
  • अशोक की उपाधि – देवानांप्रिय प्रियदर्शी।
  • अशोक के अभिलेखों की प्रमुख भाषा – प्राकृत।
  • अशोक के अभिलेखों की प्रमुख लिपि – ब्राह्मी।
  • अशोक नाम का उल्लेख – मास्की अभिलेख।
  • कलिंग युद्ध का वर्णन – 13वें शिलालेख में।
  • धर्म महामात्रों का उल्लेख – 5वें शिलालेख में।
  • धार्मिक सहिष्णुता – 12वें शिलालेख में।
  • पशु वध निषेध – 1वें शिलालेख में।
  • धर्मयात्रा का उल्लेख – 8वें शिलालेख में।

मौर्य प्रशासन की इकाइयाँ (Units of Mauryan Administration) – एक पंक्ति में

  • साम्राज्य (Samrajya) – मौर्य प्रशासन की सर्वोच्च इकाई थी।
  • प्रान्त (Prant) – कुमार/राजकुमार द्वारा शासित प्रशासनिक इकाई।
  • मंडल (Mandala) – प्रदेश्टा के नियंत्रण में रहने वाली इकाई।
  • आहार/विषय (Ahar/Vishaya) – विषयपति द्वारा संचालित जिला स्तर की इकाई।
  • स्थानीय (Sthaniya) – लगभग 800 गाँवों का समूह।
  • द्रोणमुख (Dronamukha) – लगभग 400 गाँवों का समूह।
  • खार्वटिक (Kharvatika) – लगभग 200 गाँवों का समूह।
  • संग्रहण (Sangrahana) – लगभग 10 गाँवों का समूह।
  • ग्राम (Grama) – प्रशासन की सबसे छोटी इकाई।

मौर्यकाल के प्रमुख अधिकारी (Important Officials) – एक पंक्ति में

  • कुप्याध्यक्ष – वनों का प्रबंधक।
  • आकराध्यक्ष – खानों का अधीक्षक।
  • सीताध्यक्ष – कृषि विभाग का प्रमुख।
  • लक्षणाध्यक्ष – टकसाल (मुद्रा निर्माण) का अधिकारी।
  • विवीताध्यक्ष – चारागाह भूमि का अधिकारी।
  • पौतवाध्यक्ष – बाट एवं माप का नियंत्रक।
  • सूनाध्यक्ष – पशु वधशालाओं का नियंत्रक।
  • पण्याध्यक्ष – व्यापार एवं वाणिज्य का अधीक्षक।

कौटिल्य के अनुसार 18 तीर्थ (महत्वपूर्ण पदाधिकारी) – एक पंक्ति में

1. मंत्री (Mantri)

  • प्रधानमंत्री – राज्य का मुख्य सलाहकार।

2. युवराज (Yuvaraja)

  • उत्तराधिकारी राजकुमार

3. समाहर्ता (Samaharta)

  • राजस्व संग्रह का प्रमुख अधिकारी

4. सन्निधाता (Sannidhata)

  • कोषाध्यक्ष (Treasurer)

5. सेनापति (Senapati)

  • सेना का प्रधान सेनानायक

6. प्रदेश्टा (Pradeshta)

  • मुख्य न्यायाधीश एवं प्रशासनिक अधिकारी

7. व्यवहारिक (Vyavaharika)

  • दीवानी न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश

8. दण्डपाल (Dandapala)

  • सैन्य संसाधनों एवं अनुशासन का अधिकारी

9. अन्तपाल (Antapala)

  • सीमा सुरक्षा अधिकारी

10. कर्मान्तिक (Karmantika)

  • उद्योग एवं खानों का प्रमुख

11. दुर्गपाल (Durgapala)

  • किलों का रक्षक

12. प्रशास्ता (Prashasta)

  • राजकीय अभिलेख एवं दस्तावेजों का प्रमुख

13. दौवारिक (Dauvarika)

  • राजमहल के द्वारों का अधिकारी

14. अन्तर्वंशिक (Antarvanshika)

  • राजा के निजी अंगरक्षकों का प्रमुख

15. आटविक (Atavika)

  • वन विभाग का अधिकारी

16. मंत्रिपरिषदाध्यक्ष (Mantriparishadadhyaksha)

  • मंत्रिपरिषद का अध्यक्ष

17. नायक (Nayaka)

  • सेना का कमांडर

अशोक के 14 प्रमुख शिलालेख – त्वरित पुनरावृत्ति

  • प्रथम शिलालेख – पशु वध पर प्रतिबंध।
  • द्वितीय शिलालेख – चिकित्सा व्यवस्था एवं चोल-पाण्ड्य का उल्लेख।
  • तृतीय शिलालेख – ब्राह्मणों का सम्मान।
  • चतुर्थ शिलालेख – धर्म प्रचार।
  • पंचम शिलालेख – धर्म महामात्रों की नियुक्ति।
  • षष्ठ शिलालेख – जनकल्याण।
  • सप्तम शिलालेख – धार्मिक सहिष्णुता।
  • अष्टम शिलालेख – धर्मयात्रा।
  • नवम शिलालेख – कर्मकाण्डों की आलोचना।
  • दशम शिलालेख – धम्म की महत्ता।
  • एकादश शिलालेख – धम्म की व्याख्या।
  • द्वादश शिलालेख – सभी धर्मों के प्रति सम्मान।
  • त्रयोदश शिलालेख – कलिंग युद्ध एवं पश्चाताप।
  • चतुर्दश शिलालेख – अभिलेखों का सार एवं प्रसार।

SSC/Railway Quick Revision

  • मौर्य साम्राज्य की सबसे छोटी इकाई – ग्राम।
  • 800 गाँवों का समूह – स्थानीय।
  • 400 गाँवों का समूह – द्रोणमुख।
  • 200 गाँवों का समूह – खार्वटिक।
  • 10 गाँवों का समूह – संग्रहण।
  • समाहर्ता – राजस्व संग्रह अधिकारी।
  • सन्निधाता – कोषाध्यक्ष।
  • सेनापति – सेना प्रमुख।
  • अन्तपाल – सीमा रक्षक अधिकारी।
  • दुर्गपाल – किलों का रक्षक।
  • सीताध्यक्ष – कृषि विभाग का प्रमुख।
  • पण्याध्यक्ष – व्यापार विभाग का प्रमुख।
  • पौतवाध्यक्ष – बाट-माप नियंत्रक।

मौर्यकाल के प्रमुख कर (Important Taxes) – एक पंक्ति में

  • पिण्डकर (Pindakara) – गाँवों के समूह पर लगाया जाने वाला कर।
  • भाग (Bhaga) – भूमि उपज पर लगाया जाने वाला भू-राजस्व (Land Tax)।
  • बलि (Bali) – धार्मिक कर या श्रद्धा-कर।
  • प्रणय (Pranaya) – आपातकालीन कर (Emergency Tax)।
  • हिरण्य (Hiranya) – नकद रूप में दिया जाने वाला कर।
  • विश्टि (Vishti) – बेगार या अनिवार्य श्रम कर (Forced Labour Tax)।
  • उदक-भाग (Udaka-Bhaga) – सिंचित भूमि पर लगाया जाने वाला जल कर (Water Tax)।
  • परिघ (Parigha) – एकाधिकार (Monopoly) कर।

SSC/Railway Quick Revision

  • भूमि कर – भाग।
  • जल कर – उदक-भाग।
  • नकद कर – हिरण्य।
  • धार्मिक कर – बलि।
  • आपातकालीन कर – प्रणय।
  • बेगार/अनिवार्य श्रम कर – विश्टि।
  • गाँवों के समूह पर कर – पिण्डकर।
  • एकाधिकार कर – परिघ।

याद रखने की ट्रिक

"भाग-बलि-प्रणय-हिरण्य, विश्टि-उदक-परिघ-पिण्ड"

  • भाग → भूमि कर
  • बलि → धार्मिक कर
  • प्रणय → आपातकालीन कर
  • हिरण्य → नकद कर
  • विश्टि → बेगार कर
  • उदक-भाग → जल कर
  • परिघ → एकाधिकार कर
  • पिण्डकर → गाँव समूह कर

गुप्त काल (Gupta Period) – एक पंक्ति में

चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के नवरत्न

  • कालिदास – महान संस्कृत कवि एवं नाटककार।
  • वररुचि – प्रसिद्ध व्याकरणाचार्य।
  • अमरसिंह – 'अमरकोश' के रचयिता।
  • धन्वन्तरि – आयुर्वेद के विद्वान।
  • क्षपणक – ज्योतिष एवं दर्शन के विद्वान।
  • वेतालभट्ट – तंत्र एवं साहित्य के विद्वान।
  • वराहमिहिर – प्रसिद्ध खगोलशास्त्री एवं ज्योतिषी।
  • शंकु – वास्तु एवं भूगोल विशेषज्ञ।
  • हरिषेण – कवि एवं प्रशस्ति लेखक।

कालिदास की प्रमुख रचनाएँ (Works of Kalidasa)

  • अभिज्ञानशाकुन्तलम् – संस्कृत का प्रसिद्ध नाटक।
  • विक्रमोर्वशीयम् – नाटक।
  • मालविकाग्निमित्रम् – नाटक।
  • कुमारसंभवम् – महाकाव्य।
  • रघुवंशम् – महाकाव्य।
  • मेघदूतम् – खंडकाव्य।
  • ऋतुसंहार – ऋतुओं का काव्यात्मक वर्णन।

हर्षवर्धन (Harshavardhana) – एक पंक्ति में

  • शासनकाल – 606 ईस्वी से 647 ईस्वी तक।
  • पिता – प्रभाकरवर्धन।
  • माता – यशोमती।
  • उपाधि – शिलादित्य।
  • राजधानी – थानेश्वर एवं बाद में कन्नौज।
  • स्वयं लेखक थे – हर्षवर्धन ने कई ग्रंथ लिखे।
  • प्रमुख रचनाएँ – प्रियदर्शिका, रत्नावली एवं नागानंद।

संगम काल (300 ईसा पूर्व – 300 ईस्वी)

  • संगम काल में तीन प्रमुख राजवंश – चोल, चेर और पाण्ड्य थे।
  • तीनों संगमों का संरक्षण – पाण्ड्य राजाओं ने किया।
  • संगम सभाएँ – मदुरै क्षेत्र में आयोजित की जाती थीं।

प्रथम संगम

  • स्थान – मदुरै।
  • अध्यक्ष – अगस्त्य ऋषि।
  • विशेषता – इसकी कोई रचना उपलब्ध नहीं है।

द्वितीय संगम

  • स्थान – कपाटपुरम्।
  • अध्यक्ष – तोलकाप्पियर।
  • विशेषता – 'तोलकाप्पियम' की रचना इसी काल में हुई।

तृतीय संगम

  • स्थान – उत्तर मदुरै।
  • अध्यक्ष – नक्कीरर।
  • विशेषता – अधिकांश संगम साहित्य उपलब्ध है।

SSC/Railway Quick Revision

  • विक्रमादित्य कौन थे? – चन्द्रगुप्त द्वितीय।
  • नवरत्न किसके दरबार में थे? – चन्द्रगुप्त द्वितीय।
  • अमरकोश के रचयिता – अमरसिंह।
  • अभिज्ञानशाकुन्तलम् के लेखक – कालिदास।
  • मेघदूतम् के लेखक – कालिदास।
  • रघुवंशम् के लेखक – कालिदास।
  • हर्षवर्धन की उपाधि – शिलादित्य।
  • हर्षवर्धन की राजधानी – कन्नौज।
  • प्रियदर्शिका के लेखक – हर्षवर्धन।
  • संगम साहित्य की भाषा – तमिल।
  • संगमों के संरक्षक – पाण्ड्य राजा।
  • तोलकाप्पियम के रचयिता – तोलकाप्पियर।
  • संगम काल के प्रमुख राजवंश – चोल, चेर, पाण्ड्य।

प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण अभिलेख – एक पंक्ति में

वैदिक एवं प्रारम्भिक अभिलेख

  • बोगाज़कोई अभिलेख (14वीं शताब्दी ई.पू.) – एशिया माइनर (तुर्की) में मिला; इसमें इन्द्र, मित्र, वरुण एवं नासत्य का उल्लेख है।
  • जूनागढ़ अभिलेख (रुद्रदामन) – संस्कृत का प्रथम एवं सबसे विस्तृत शिलालेख माना जाता है।
  • बेसनगर (गरुड़ध्वज) अभिलेख – यूनानी राजदूत हेलियोडोरस द्वारा स्थापित; ब्राह्मी लिपि एवं प्राकृत भाषा में।

गुप्तकाल एवं उत्तरकालीन अभिलेख

  • मंदसौर अभिलेख (532 ई.) – यशोधर्मन की उपलब्धियों का वर्णन करता है।
  • बदामी अभिलेख (543 ई.) – कर्नाटक का प्रथम अभिलेख; चालुक्य शासक पुलकेशिन-I से संबंधित।
  • ऐहोल अभिलेख – पुलकेशिन-II की विजयों का वर्णन; रचयिता रविकीर्ति।
  • बिलसद अभिलेख (415-16 ई.) – कुमारगुप्त प्रथम का अभिलेख।
  • प्रयाग स्तंभ लेख (गुप्तकाल) – गुप्त वंश का महत्वपूर्ण स्रोत।
  • मंदसौर अभिलेख (मालवा) – कुमारगुप्त-II एवं बन्धुवर्मन का उल्लेख।
  • करमदण्डा अभिलेख – शिव प्रतिमा की स्थापना का उल्लेख।
  • मनकुवर अभिलेख (448 ई.) – बुद्धमित्र द्वारा स्थापित बुद्ध प्रतिमा का उल्लेख।
  • सांची अभिलेख (450 ई.) – गुप्त संवत 131 का उल्लेख।
  • हाथीगुम्फा अभिलेख – कलिंग नरेश खारवेल की उपलब्धियों का प्रमुख स्रोत।
  • रबातक अभिलेख – कुषाण शासकों विशेषकर कनिष्क की जानकारी देता है।
  • प्रयाग प्रशस्ति – समुद्रगुप्त की विजयों का वर्णन; रचयिता हरिषेण।
  • उत्तिरमेरूर अभिलेख – चोलकालीन स्थानीय स्वशासन की जानकारी देता है।
  • अयोध्या अभिलेख – पुष्यमित्र शुंग के राज्यपाल धनदेव का उल्लेख; अश्वमेध यज्ञ का प्रथम उल्लेख।
  • सांची अभिलेख (412 ई.) – चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल का उल्लेख।
  • मेहरौली लौह स्तंभ अभिलेख – चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य की उपलब्धियों का वर्णन।

गुप्तकालीन ताम्रपत्र एवं अन्य अभिलेख

  • तुमैन अभिलेख (435 ई.) – कुमारगुप्त प्रथम को "अष्टम सूर्य" कहा गया।
  • धनैदह ताम्रपत्र – कुमारगुप्त के प्रशासन का वर्णन।
  • दामोदरपुर ताम्रपत्र – गुप्त प्रशासन एवं भूमि दान की जानकारी देता है।
  • बैग्राम ताम्रपत्र – गोविन्द स्वामी मंदिर हेतु भूमि दान का उल्लेख।
  • भितरी स्तंभ लेख – स्कन्दगुप्त की हूणों पर विजय का वर्णन।
  • कहोम स्तंभ लेख – स्कन्दगुप्त काल का अभिलेख।
  • सुपिया अभिलेख – स्कन्दगुप्त की वंशावली का उल्लेख।
  • जूनागढ़ अभिलेख (स्कन्दगुप्त) – सुदर्शन झील की मरम्मत का वर्णन।
  • इन्दौर ताम्रपत्र – सूर्य मंदिर हेतु तेलियों के दान का उल्लेख।
  • गढ़वा अभिलेख – गुप्त संवत 148 (467 ई.) का उल्लेख।
  • बाँसखेड़ा अभिलेख – हर्षवर्धन की विजय एवं प्रशासन की जानकारी देता है।
  • माहुबन ताम्रपत्र – हर्षकालीन प्रशासन एवं भूमि दान का उल्लेख।
  • महाकूट अभिलेख – चालुक्य शासक कीर्तिवर्मन-I का उल्लेख।
  • बिजौलिया अभिलेख – चौहान वंश के इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत।

SSC/Railway Quick Revision

  • प्रथम संस्कृत शिलालेख – जूनागढ़ अभिलेख (रुद्रदामन)।
  • समुद्रगुप्त का अभिलेख – प्रयाग प्रशस्ति।
  • प्रयाग प्रशस्ति के लेखक – हरिषेण।
  • खारवेल का अभिलेख – हाथीगुम्फा।
  • कनिष्क से संबंधित अभिलेख – रबातक अभिलेख।
  • स्थानीय स्वशासन का प्रमाण – उत्तिरमेरूर अभिलेख।
  • हूणों पर विजय का वर्णन – भितरी स्तंभ लेख।
  • चन्द्रगुप्त द्वितीय का अभिलेख – मेहरौली लौह स्तंभ लेख।
  • अश्वमेध यज्ञ का उल्लेख – अयोध्या अभिलेख।
  • सुदर्शन झील की मरम्मत – जूनागढ़ अभिलेख (स्कन्दगुप्त)।
  • कुमारगुप्त का अभिलेख – बिलसद अभिलेख।
  • पुलकेशिन-II का अभिलेख – ऐहोल अभिलेख।
  • यशोधर्मन का अभिलेख – मंदसौर अभिलेख।
  • हर्षवर्धन का अभिलेख – बाँसखेड़ा अभिलेख।

प्राचीन भारत की स्थापत्य कला (Architecture of Ancient India) – एक पंक्ति में

सिंधु सभ्यता की प्रमुख मूर्तियाँ

  • दाढ़ी वाले पुरोहित की मूर्ति – मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई।
  • कांस्य नर्तकी (Bronze Dancer) – मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई।
  • कांस्य नर्तकी का निर्माण – 'लॉस्ट वैक्स तकनीक' (Lost Wax Technique) से किया गया।
  • मातृदेवी (Mother Goddess) की मूर्ति – बेलन घाटी के लोहंडा नाला (उत्तर प्रदेश) से प्राप्त हुई।

मौर्योत्तर काल की तीन प्रमुख मूर्तिकला शैलियाँ

1. गांधार शैली (Gandhara Style)

  • निर्माण सामग्री – भूरे एवं धूसर पत्थर।
  • विकास क्षेत्र – उत्तर-पश्चिम भारत।
  • प्रभाव – यूनानी (ग्रीक) कला का प्रभाव।
  • विशेषता – बुद्ध की मूर्तियों में घुंघराले बाल, गहरी आँखें एवं वस्त्रों की स्पष्ट सिलवटें।
  • अन्य नाम – ग्रीको-बौद्ध कला।

2. मथुरा शैली (Mathura Style)

  • निर्माण सामग्री – लाल चित्तीदार बलुआ पत्थर।
  • विकास क्षेत्र – मथुरा, सोख एवं कंकाली टीला।
  • प्रभाव – हिन्दू, जैन एवं बौद्ध धर्म।
  • विशेषता – बुद्ध को स्वस्थ एवं बलिष्ठ शरीर के साथ दर्शाया गया।
  • बाहरी प्रभाव – लगभग नहीं।

3. अमरावती शैली (Amaravati Style)

  • निर्माण सामग्री – सफेद संगमरमर।
  • विकास क्षेत्र – अमरावती एवं नागार्जुनकोंडा।
  • प्रभाव – मुख्यतः बौद्ध धर्म।
  • विशेषता – जातक कथाओं एवं बुद्ध के जीवन प्रसंगों का चित्रण।
  • बाहरी प्रभाव – पूर्णतः भारतीय शैली।

मौर्यकालीन मूर्तिकला (Mauryan Sculpture)

  • यक्ष मूर्ति – परखम (मथुरा) से प्राप्त हुई।
  • यक्षी मूर्ति – लगभग 7 फीट ऊँची थी।
  • यक्षी मूर्ति का प्रमुख उदाहरण – दीदारगंज यक्षी (पटना)।
  • बेसनगर की मूर्ति – हाथी दाँत (Ivory) से निर्मित।
  • बुलंदीबाग एवं कुम्हरार – लकड़ी के अवशेष प्राप्त हुए।
  • बेसनगर की मूर्तियाँ – चौथी शताब्दी ईस्वी की मानी जाती हैं।

अशोक स्तंभ की विशेषताएँ

  • एक ही पत्थर से निर्मित
  • अत्यंत चमकदार पॉलिशयुक्त
  • स्वतंत्र रूप से खड़े किए गए
  • शीर्ष पर पशु आकृतियाँ निर्मित थीं।
  • स्तंभ गोलाकार एवं चिकने थे
  • ऊपर की ओर धीरे-धीरे पतले होते जाते थे

मौर्यकालीन विहार गुफाएँ (Mauryan Vihara Caves)

गुफासमकालीन शासकपहाड़ी
सुदामाअशोकबराबर पहाड़ियाँ
कर्ण चौपड़अशोकबराबर पहाड़ियाँ
विश्व झोपड़ीअशोकबराबर पहाड़ियाँ
लोमस ऋषिअशोकबराबर पहाड़ियाँ
गोपिकादशरथनागार्जुनी पहाड़ियाँ
वपिया-का-कुभादशरथनागार्जुनी पहाड़ियाँ
वडथिका-का-कुभादशरथनागार्जुनी पहाड़ियाँ
सीतामढ़ीकिसी पहाड़ी पर नहीं

SSC/Railway Quick Revision

  • ग्रीको-बौद्ध कला – गांधार शैली।
  • लाल बलुआ पत्थर – मथुरा शैली।
  • सफेद संगमरमर – अमरावती शैली।
  • दीदारगंज यक्षी – पटना।
  • कांस्य नर्तकी – मोहनजोदड़ो।
  • लॉस्ट वैक्स तकनीक – कांस्य नर्तकी।
  • एकाश्मक स्तंभ (Monolithic Pillar) – अशोक स्तंभ।
  • लोमस ऋषि गुफा – बराबर पहाड़ियाँ।
  • गोपिका गुफा – नागार्जुनी पहाड़ियाँ।
  • गांधार शैली पर प्रभाव – यूनानी कला।
  • मथुरा शैली की सामग्री – लाल चित्तीदार बलुआ पत्थर।
  • अमरावती शैली की सामग्री – सफेद संगमरमर।

सातवाहन काल की स्थापत्य कला (Architecture of Satavahana Period) – एक पंक्ति में

प्रमुख स्तूप

  • अमरावती स्तूप – गुंटूर (आंध्र प्रदेश) में स्थित; कर्नल मैकेंज़ी ने इसकी खोज की।
  • नागार्जुनकोंडा स्तूप – कृष्णा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित; लांगहर्स्ट ने 1926 ई. में उत्खनन कराया।

प्रमुख गुफाएँ

  • भाजा गुफाएँ – पुणे (महाराष्ट्र); दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की।
  • अजंता गुफाएँ – औरंगाबाद (महाराष्ट्र); दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से संबंधित।
  • कार्ले गुफाएँ – पुणे (भोरघाट पहाड़ी); पुलुमावी काल में निर्मित।
  • कन्हेरी गुफाएँ – मुंबई (सालसेट द्वीप); कार्ले गुफाओं की शैली पर आधारित।
  • विशेष तथ्य – इनमें से अधिकांश गुफाएँ बौद्ध चैत्य एवं विहार हैं।

गुप्तकालीन स्थापत्य कला (Architecture of Gupta Period)

प्रमुख मंदिर

  • तिगवा विष्णु मंदिर – जबलपुर, मध्य प्रदेश।
  • एरण विष्णु मंदिर – सागर, मध्य प्रदेश।
  • नचना-कुठार पार्वती मंदिर – पन्ना, मध्य प्रदेश।
  • भूमरा मंदिर – सतना, मध्य प्रदेश।
  • देवगढ़ का दशावतार मंदिर – ललितपुर, उत्तर प्रदेश।
  • भितरगाँव मंदिर – कानपुर, उत्तर प्रदेश।

प्रमुख स्तूप

  • भरहुत स्तूप – सतना (मध्य प्रदेश); ईंटों से निर्मित।
  • सांची स्तूप (स्तूप-3) – रायसेन (मध्य प्रदेश); सारिपुत्र एवं महा-मौद्गल्यायन के अवशेष सुरक्षित हैं।

मंदिर स्थापत्य की प्रमुख शैलियाँ

नागर शैली (Nagara Style)

  • प्रचलन क्षेत्र – सम्पूर्ण उत्तर भारत।
  • मंदिर का आधार – वर्गाकार।
  • शिखर – मधुमक्खी के छत्ते (Beehive) जैसा।
  • गर्भगृह – शिखर के नीचे स्थित।
  • आमलक – शिखर के शीर्ष पर स्थित वृत्ताकार संरचना।
  • द्वारपाल मूर्तियाँ – गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर।

द्रविड़ शैली (Dravida Style)

  • प्रचलन क्षेत्र – दक्षिण भारत।
  • विमान – मंदिर का ऊँचा पिरामिडाकार भाग।
  • गोपुरम – विशाल प्रवेश द्वार।
  • उत्पत्ति – छठी शताब्दी ईस्वी के आसपास।

वेसर शैली (Vesara Style)

  • नागर एवं द्रविड़ शैली का मिश्रण
  • प्रचलन क्षेत्र – दक्कन क्षेत्र।
  • मंडप एवं प्रवेश द्वार – अत्यंत अलंकृत।

होयसला शैली (Hoysala Style)

  • निर्माण सामग्री – साबुन पत्थर (Soapstone)।
  • विशेषता – अत्यंत सूक्ष्म नक्काशी।

विजयनगर शैली (Vijayanagara Style)

  • मंदिर ऊँचे चबूतरे पर निर्मित होते थे।
  • पिरामिडाकार गोपुरम इसकी प्रमुख विशेषता है।
  • मंदिरों की दीवारों पर मूर्तिकला का उत्कृष्ट प्रदर्शन मिलता है।
  • संगीत, नृत्य एवं नाटक के प्रदर्शन हेतु मंडप बनाए जाते थे।

नायक शैली (Nayaka Style)

  • प्रसिद्धि – विशाल गोपुरमों के लिए।
  • विशेषता – मंदिर परिसर का विस्तार एवं प्रदक्षिणा पथ का निर्माण।

पाल एवं सेन शैली (Pala-Sena Style)

  • निर्माण सामग्री – काली बेसाल्ट एवं चिकनी मिट्टी।
  • विशेषता – मूर्तिकला में उत्कृष्टता।
  • धातु मूर्तियाँ – प्रसिद्ध।
  • वास्तुकला – बाँस की झोपड़ियों से प्रेरित।

SSC/Railway Quick Revision

  • अमरावती स्तूप – आंध्र प्रदेश।
  • नागार्जुनकोंडा स्तूप – कृष्णा नदी तट।
  • कार्ले गुफाएँ – महाराष्ट्र।
  • कन्हेरी गुफाएँ – मुंबई।
  • दशावतार मंदिर – देवगढ़।
  • भितरगाँव मंदिर – कानपुर।
  • नागर शैली – उत्तर भारत।
  • द्रविड़ शैली – दक्षिण भारत।
  • वेसर शैली – नागर + द्रविड़ मिश्रण।
  • होयसला शैली – साबुन पत्थर।
  • विजयनगर शैली – विशाल गोपुरम।
  • नायक शैली – प्रदक्षिणा पथ।
  • पाल-सेन शैली – काला बेसाल्ट पत्थर।

भारतीय इतिहास के प्रमुख राजवंश (Major Dynasties of Indian History) – एक पंक्ति में

  • हर्यंक वंश – राजधानी : राजगृह | संस्थापक : बिम्बिसार।
  • शिशुनाग वंश – राजधानी : गिरिव्रज (राजगृह) | संस्थापक : शिशुनाग।
  • नंद वंश – राजधानी : पाटलिपुत्र | संस्थापक : महापद्मनंद।
  • मौर्य वंश – राजधानी : पाटलिपुत्र | संस्थापक : चन्द्रगुप्त मौर्य।
  • शुंग वंश – राजधानी : पाटलिपुत्र | संस्थापक : पुष्यमित्र शुंग।
  • कण्व वंश – राजधानी : पाटलिपुत्र | संस्थापक : वसुदेव कण्व।
  • गुप्त वंश – राजधानी : पाटलिपुत्र | संस्थापक : श्रीगुप्त।
  • वर्धन वंश – राजधानी : थानेश्वर | संस्थापक : पुष्यभूति।
  • चालुक्य (बादामी) – राजधानी : वातापी (बादामी) | संस्थापक : जयसिंह।
  • चालुक्य (कल्याणी) – राजधानी : मान्यखेट | संस्थापक : तैलप-II।
  • चोल वंश – राजधानी : तंजावुर | संस्थापक : विजयालय।
  • सातवाहन वंश – राजधानी : प्रतिष्ठान (पैठन) | संस्थापक : सिमुक।
  • चेरा वंश – राजधानी : वंजी | संस्थापक : वनवरम्बन।
  • पल्लव वंश – राजधानी : कांची | संस्थापक : सिंहविष्णु।
  • राष्ट्रकूट वंश – राजधानी : मान्यखेट | संस्थापक : दन्तिदुर्ग।
  • काकतीय वंश – राजधानी : वारंगल | संस्थापक : काकतीय रुद्रदेव-I।
  • गंग वंश – राजधानी : कल्याणपुर | संस्थापक : वीर गंग।
  • गुर्जर-प्रतिहार वंश – राजधानी : भीनमाल | संस्थापक : नागभट्ट-I।
  • पाल वंश – राजधानी : मुंगेर | संस्थापक : गोपाल।
  • सेन वंश – राजधानी : नवद्वीप | संस्थापक : सामंत सेन।

आधुनिक भारत के प्रमुख युद्ध (Major Wars of Modern India) – एक पंक्ति में

प्लासी का युद्ध (Battle of Plassey)

  • वर्ष – 1757 ई.
  • स्थान – प्लासी (पश्चिम बंगाल)।
  • युद्ध – सिराजुद्दौला बनाम रॉबर्ट क्लाइव।
  • परिणाम – अंग्रेजों की विजय; भारत में ब्रिटिश सत्ता की नींव पड़ी।

वांडीवाश का युद्ध (Battle of Wandiwash)

  • वर्ष – 1760 ई.
  • स्थान – वांडीवाश (तमिलनाडु)।
  • युद्ध – अंग्रेज बनाम फ्रांसीसी।
  • परिणाम – भारत में फ्रांसीसी शक्ति का अंत।

बक्सर का युद्ध (Battle of Buxar)

  • वर्ष – 1764 ई.
  • स्थान – बक्सर (बिहार)।
  • युद्ध – मीर कासिम + शुजाउद्दौला + शाह आलम-II बनाम अंग्रेज।
  • परिणाम – अंग्रेजों की निर्णायक विजय।

प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध

  • वर्ष – 1767–69 ई.
  • युद्ध – हैदर अली बनाम अंग्रेज।
  • परिणाम – मद्रास की संधि।

द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध

  • वर्ष – 1780–84 ई.
  • युद्ध – हैदर अली एवं टीपू सुल्तान बनाम अंग्रेज।
  • परिणाम – मंगलौर की संधि।

तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध

  • वर्ष – 1790–92 ई.
  • युद्ध – टीपू सुल्तान बनाम अंग्रेज।
  • परिणाम – श्रीरंगपट्टनम की संधि।

चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध

  • वर्ष – 1799 ई.
  • युद्ध – टीपू सुल्तान बनाम अंग्रेज।
  • परिणाम – टीपू सुल्तान की मृत्यु; मैसूर पर अंग्रेजों का अधिकार।

कलिंग युद्ध

  • वर्ष – 261 ईसा पूर्व।
  • युद्ध – अशोक बनाम कलिंग।
  • परिणाम – अशोक की विजय; बाद में बौद्ध धर्म अपनाया।

हाइडेस्पीज़ का युद्ध (Battle of Hydaspes)

  • वर्ष – 326 ईसा पूर्व।
  • स्थान – झेलम नदी।
  • युद्ध – सिकंदर बनाम राजा पोरस।
  • परिणाम – सिकंदर की विजय, परन्तु पोरस की वीरता से प्रभावित हुआ।

SSC/Railway Quick Revision

  • मौर्य वंश के संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य।
  • गुप्त वंश के संस्थापक – श्रीगुप्त।
  • पाल वंश के संस्थापक – गोपाल।
  • चोल वंश के संस्थापक – विजयालय।
  • राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक – दन्तिदुर्ग।
  • प्लासी का युद्ध – 1757।
  • बक्सर का युद्ध – 1764।
  • वांडीवाश का युद्ध – 1760।
  • कलिंग युद्ध – 261 ईसा पूर्व।
  • हाइडेस्पीज़ का युद्ध – 326 ईसा पूर्व।
  • प्लासी में अंग्रेजों का सेनापति – रॉबर्ट क्लाइव।
  • हाइडेस्पीज़ में भारतीय राजा – पोरस।
  • कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाने वाला शासक – अशोक।


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